

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Parliament's Monsoon Session concludes amidst uproar; political standoff escalates after Amit Shah's offer for a discussion is rejected.
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का समापन भी राजनीतिक टकराव के बीच होता दिखाई दे रहा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बनी सहमति की सभी कोशिशें विफल रहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं चर्चा में शामिल होकर सभी सवालों का जवाब देने की पेशकश की, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहरा दी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विपक्ष की सहमति से चर्चा के लिए समय निर्धारित करने का आग्रह किया। शाह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह पूरे समय सदन में मौजूद रहेंगे, सभी सदस्यों की बात सुनेंगे और हर सवाल का जवाब देंगेउन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है और संसद में खुली चर्चा से सभी तथ्यों को सामने लाया जा सकता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार की पेशकश को पर्याप्त नहीं माना। उन्होंने कहा कि छात्रों और देश को भाषण नहीं, बल्कि उन सवालों के स्पष्ट जवाब चाहिए जिनमें कथित पुलिस कार्रवाई के आदेश देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो।राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस कार्रवाई गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई है तो इसकी राजनीतिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और गृह मंत्री स्वयं जवाब देने को तैयार हैं, तब विपक्ष बहस से क्यों बच रहा है। सरकार का कहना है कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और सभी मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
बुधवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्ष के विरोध के कारण सदन में हंगामा शुरू हो गया। लगातार शोर-शराबे के बीच कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और अध्यक्ष ने सदन को स्थगित कर दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में भी प्रदर्शन किया।
संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन भी गतिरोध समाप्त होने की संभावना कम नजर आ रही है। हालांकि यदि दोनों पक्ष चर्चा पर सहमत होते हैं तो अध्यक्ष विशेष समय निर्धारित कर बहस करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कार्यवाही देर रात तक भी चल सकती है।
संसदीय गतिरोध के बावजूद सरकार ने कुछ अहम विधायी कार्य पूरे किए। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया। वहीं खान एवं खनिज विकास से जुड़ा विधेयक लोकसभा से पारित हुआ। इसके अलावा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से संबंधित विधेयक को भी संसद की मंजूरी मिल गई, जिससे निगम को सहकारी संस्थाओं को सीधे ऋण और अनुदान देने का अधिकार मिलेगा।