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Police verification of tenants has become a major concern in Raipur... hundreds of thousands of people are living in the city without any official record.
रायपुर। लगातार बढ़ती आबादी और दूसरे राज्यों से आकर बसने वाले लोगों की संख्या के बीच किरायेदारों के पुलिस सत्यापन की व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। राजधानी में लाखों लोग किराये के मकानों, फ्लैटों और पीजी में रह रहे हैं, लेकिन पुलिस के रिकॉर्ड में उनका बेहद छोटा हिस्सा ही दर्ज है। हाल के वर्षों में सामने आए कई चर्चित अपराधों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना सत्यापन के किरायेदार रखना सुरक्षा के लिहाज से बड़ा जोखिम बन सकता है।
राजधानी की आबादी 20 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। अनुमान है कि यहां पांच लाख से अधिक लोग किराये के मकानों में रह रहे हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलाकर केवल करीब 4300 किरायेदारों का ही पुलिस सत्यापन दर्ज है। यानी वास्तविक संख्या की तुलना में यह आंकड़ा एक प्रतिशत से भी कम माना जा रहा है।पुलिस के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में चोरी, लूट, धोखाधड़ी और अन्य संगठित अपराधों के अधिकांश मामलों में बाहरी राज्यों से आए लोगों की संलिप्तता सामने आई है। ऐसे में किरायेदारों का सत्यापन सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ पुलिस के सिटीजन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक राज्यभर में अब तक केवल 24,374 किरायेदारों का पुलिस सत्यापन दर्ज किया गया है। इनमें लगभग 1,800 ऑनलाइन सत्यापन रायपुर से जुड़े हैं, जबकि कमिश्नरेट क्षेत्र के विभिन्न थानों में करीब 2,500 लोगों का ऑफलाइन वेरिफिकेशन किया गया है।पड़ताल में यह भी सामने आया कि राजधानी के सभी थाना क्षेत्रों का एकीकृत और अद्यतन डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन करना और मुश्किल हो जाता है।
वर्ष 2025 में डीडी नगर थाना क्षेत्र की इंद्रप्रस्थ कॉलोनी में हुए चर्चित सूटकेस मर्डर मामले ने पुलिस सत्यापन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया था। जांच में सामने आया कि किराये के मकान में रहने वाले आरोपियों ने पैसों के विवाद में हत्या कर शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की थी। बाद में पता चला कि किरायेदारों का पुलिस सत्यापन कराया ही नहीं गया था।
वर्ष 2024 में कबीर नगर थाना क्षेत्र के वीर सावरकर नगर में घरेलू विवाद के दौरान बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी थी। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि परिवार मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला था और किराये के मकान में रह रहा था, लेकिन पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। अदालत ने बाद में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
करोड़ों रुपए की चोरी की वारदातों में शामिल आरोपी लोकेश श्रीवास का मामला भी पुलिस सत्यापन की जरूरत को रेखांकित करता है। जांच में पता चला कि वह अलग-अलग राज्यों में किराये के मकान लेकर कुछ समय तक रहता और फिर स्थान बदल देता था। फरवरी 2026 में रायपुर के सिविल लाइन और मौदहापारा थाना क्षेत्रों में हुई बड़ी चोरी की घटनाओं में भी उसका नाम सामने आया था।
पुलिस का कहना है कि किरायेदारों का सत्यापन कराना मकान मालिक की जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति इस नियम का पालन नहीं करता है तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की साधारण कैद, 2500 रुपए तक का जुर्माना या दोनों तरह की सजा का प्रावधान है।
पुलिस ने बताया कि छत्तीसगढ़ सिटीजन पोर्टल और 'समाधान' एप के माध्यम से किरायेदारों का ऑनलाइन सत्यापन आसानी से कराया जा सकता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मकान मालिक इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऑफलाइन व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित और केंद्रीकृत बनाने की तैयारी की जा रही है।
रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि सभी मकान मालिकों के लिए किरायेदारों का सत्यापन अनिवार्य है। उनका कहना है कि जब पुलिस के पास किरायेदारों का पूरा विवरण रहेगा तो अपराध करने वालों में कानून का भय बना रहेगा और अपराध के बाद उनकी पहचान करना भी आसान होगा।
रायपुर उत्तर की डीसीपी दीपमाला कश्यप ने बताया कि सभी थाना प्रभारियों को सत्यापन अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने मकान मालिकों से अपील की कि वे किरायेदारों के साथ-साथ कुक, ड्राइवर, केयरटेकर और अन्य घरेलू सहायकों का भी पुलिस सत्यापन अवश्य कराएं। इसके लिए संबंधित थाने से संपर्क किया जा सकता है या 'समाधान' एप के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।