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Political conflict intensifies over Maoist issue; Say and Baghel face off over Bastar, heated political debate with sharp accusations.
रायपुर। रायपुर में माओवादी हिंसा के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे राज्य की सियासत में टकराव बढ़ता जा रहा है।विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने अपेक्षित सहयोग नहीं दिया, जिसके कारण माओवादी हिंसा को खत्म करने की प्रक्रिया धीमी रही।
कांग्रेस पर तीखा हमला सहयोग नहीं देने का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यदि पूर्ववर्ती सरकार ने सही तरीके से काम किया होता, तो माओवादी हिंसा बहुत पहले ही कमजोर पड़ चुकी होती। उन्होंने कांग्रेस पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष तथ्यों को तोड़ मरोड़कर जनता के सामने रख रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की मंशा थी कि अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी माओवादी हिंसा को तेजी से खत्म किया जाए, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से प्रक्रिया प्रभावित हुई।
भूपेश बघेल का पलटवार भाजपा पर गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि असल में झूठ फैलाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में भी बस्तर में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था मौजूद थी।बघेल ने दावा किया कि उस समय कैंपों में राशन, स्कूल और अन्य व्यवस्थाएं पहले से चल रही थीं, जिन्हें अब नई उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद केंद्रीय गृह मंत्री के बस्तर दौरे के दौरान दिए गए बयानों के बाद और तेज हो गया है। सरकार का कहना है कि 13 दिसंबर 2023 के बाद राज्य में नई सरकार बनने के बाद केंद्र और राज्य के समन्वय से माओवादी हिंसा के खिलाफ अभियान को नई गति मिली है।सरकार के अनुसार सुरक्षा बलों का साहस, विकास कार्यों की गति और जनता के विश्वास से बस्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
बस्तर विकास पर दो अलग-अलग दावे और राजनीतिक टकराव
सरकार का दावा है कि बस्तर को हिंसा और पिछड़ेपन की पहचान से निकालकर शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।वहीं विपक्ष का कहना है कि पुरानी योजनाओं को नया नाम देकर उन्हें उपलब्धि के रूप में पेश किया जा रहा है, जिससे जनता को भ्रमित किया जा रहा है।