

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार
.jpg&w=3840&q=75)
Political differences aside, PM Modi is increasing India's respect abroad: Sharad Pawar
मुंबई। शरद पवार ने कहा है कि भले ही उनकी राजनीतिक विचारधारा नरेंद्र मोदी से अलग हो, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब देश के सम्मान और राष्ट्रीय हित की बात हो, तब राजनीतिक मतभेदों को आड़े नहीं आने देना चाहिए।
राष्ट्रीय हित में एकजुट होने की अपील
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, सभी दलों और नेताओं को साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हमारी राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन जब बात राष्ट्र के सम्मान की हो, तब राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए।”
इंदिरा गांधी, नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह का किया उल्लेख
पवार ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्रियों इंदिरा गांधी, पी. वी. नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने हमेशा देश के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को अपने नेतृत्व का केंद्र बनाया।
युवावस्था के राजनीतिक सफर को किया याद
राज्यसभा सदस्य पवार पुणे स्थित एक ग्रामीण विकास फाउंडेशन द्वारा आयोजित पूर्व पदाधिकारियों के सम्मान समारोह में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन की यादें भी साझा कीं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1958 में 18 वर्ष की आयु में वे बारामती से पुणे आए थे क्योंकि उस समय वहां कॉलेज की सुविधा नहीं थी। बाद में वे युवा आंदोलन से जुड़े और कुछ वर्षों बाद पुणे शहर युवा कांग्रेस के प्रमुख बने।
जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात का किस्सा सुनाया
पवार ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन में नेहरू से मिलने के दौरान वे किसानों और युवाओं के मुद्दों पर कई सवाल लेकर गए थे, लेकिन नेहरू के प्रभावशाली व्यक्तित्व के सामने वे अपने सवाल भूल गए।
इंदिरा गांधी के सम्मान से जुड़ा प्रसंग साझा किया
शरद पवार ने इंदिरा गांधी से जुड़ा एक प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि सोवियत संघ की यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी को लगा कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है। इस पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वे 40 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और भारत के सम्मान से किसी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगी।
अलग-अलग दलों में गए सहयोगियों को दिया संदेश
पवार ने कार्यक्रम में मौजूद विभिन्न राजनीतिक दलों में काम कर रहे अपने पुराने सहयोगियों का स्वागत किया और कहा कि राजनीतिक राहें अलग हो सकती हैं, लेकिन समाज और देश के प्रति प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी को मिलकर काम करना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।