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Political row over smart meters in Chhattisgarh; government and Congress at loggerheads.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर से बढ़ रहे बिजली बिल को लेकर विरोध अभियान शुरू करने की तैयारी की है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए इसे मुद्दाविहीन राजनीति करार दिया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर केवल छत्तीसगढ़ में नहीं लगाए जा रहे हैं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी यह व्यवस्था लागू है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह केवल विरोध के लिए नए विषय तलाश रही है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं।बैज का दावा है कि कई उपभोक्ताओं की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली की रीडिंग वास्तविक खपत से ज्यादा दर्ज हो रही है, जिसके कारण बिजली बिल में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह बिल तीन गुना तक बढ़ गए हैं।
दीपक बैज ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्मार्ट मीटर को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने भी बढ़ी खपत की शिकायतों को स्वीकार किया है।कांग्रेस नेता ने मांग की कि छत्तीसगढ़ सरकार भी स्मार्ट मीटर व्यवस्था की समीक्षा करे और यदि उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है तो इसे वापस लेने का फैसला करे।
स्मार्ट मीटर का विषय विधानसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के 136 मुद्दों में भी शामिल था। कांग्रेस लगातार इसे आम जनता से जुड़ा मुद्दा बताकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।
बैज ने आरोप लगाया कि पहले बिजली मीटर में खराबी की शिकायत पर जांच की सुविधा थी, लेकिन अब उपभोक्ताओं से मीटर जांच के लिए 1000 से 1500 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि यदि मीटर में तकनीकी खराबी है तो उसकी जांच निशुल्क होनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने बिजली दरों में कई बार बढ़ोतरी की है और 400 यूनिट हाफ योजना को सीमित कर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है।
कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर और बिजली बिल के मुद्दे को लेकर इसी महीने प्रदेशव्यापी आंदोलन करने की घोषणा की है। पार्टी का कहना है कि वह उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर सड़क से सदन तक आवाज उठाएगी।वहीं, सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर आधुनिक बिजली व्यवस्था का हिस्सा हैं और कांग्रेस केवल राजनीतिक विरोध के लिए जनता को भ्रमित कर रही है।