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Political standoff over PM Awas intensifies in Chhattisgarh; government and opposition at loggerheads.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र में आवास निर्माण को लेकर बड़े फैसलों की जानकारी दी है, वहीं कांग्रेस ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल और वर्तमान सरकार के दावों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सक्ती जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 3.65 लाख अतिरिक्त मकानों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले से स्वीकृत करीब 2 लाख आवासों को पूरा कर उनके हितग्राहियों का एक साथ गृह प्रवेश कराने की तैयारीशिवराज सिंह चौहान ने सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि केंद्र के माध्यम से किसानों को है।
शिवराज सिंह चौहान ने सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि केंद्र के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, प्रशिक्षण और जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार के विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आवास योजना को गति दे रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान बस्तर में नक्सलवाद को लेकर भी केंद्रीय मंत्री ने सरकार की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को नक्सलवाद से मुक्त कराने की दिशा में अभियान जारी है और मार्च 2026 तक नक्सल समस्या के खात्मे का लक्ष्य रखा गया था। उनके मुताबिक सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
पीएम आवास की सूची को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वर्ष 2024 के बाद सरकार ने कितने आवास तैयार किए हैं।कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत आवासों को भी अपने कार्यकाल की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। पार्टी ने मांग की कि सरकार स्वीकृत और पूर्ण किए गए आवासों का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक करे।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्ष 2015 से 2018 के बीच ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आवास बनाए गए थे। पार्टी का आरोप है कि मौजूदा सरकार इन्हीं पुराने कार्यों और स्वीकृतियों को अपने खाते में जोड़कर जनता के सामने प्रस्तुत कर रही है।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जिन आवासों की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी थी, उनके निर्माण को वर्तमान सरकार की नई उपलब्धि बताना कितना उचित है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्य सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया गया। सरकार का कहना है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में पर्याप्त गति नहीं थी। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने गरीब परिवारों के आवास निर्माण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।सरकार ने दावा किया कि वर्तमान शासन में प्रधानमंत्री आवास योजना को प्राथमिकता दी गई है और पात्र परिवारों को मकान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की गई है।
कार्यक्रम में विकसित भारत के तहत छत्तीसगढ़ में करीब 3300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों पर खर्च की जानकारी भी सामने आई। सरकार के मुताबिक सड़क, आवास और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।आवास योजना के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी सरकार अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बता रही है। वहीं कांग्रेस लगातार इन योजनाओं के आंकड़ों और उपलब्धियों को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांग रही है।
सरकार की ओर से बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत राशि की पहली किस्त अक्टूबर में जारी की जा चुकी है। साथ ही आने वाले समय में नए स्वीकृत आवासों के निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा यही बना हुआ है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक कितने मकान पूर्ववर्ती सरकार के समय स्वीकृत या निर्मित हुए और वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में कितने नए आवास स्वीकृत कराए हैं। दोनों दलों के दावों के बीच अब लाभार्थियों और आवासों से जुड़े वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक होने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है