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Entertainment: Prime Video Releases New Edition of 'O Womania! Report', Finds Women's Equality in Indian Entertainment Still Slow
नई दिल्ली। इंडिया के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Prime Video ने ‘ओ वूमेनिया! 2025’ रिपोर्ट का नया संस्करण जारी किया है। Ormax Media की रिसर्च और Film Companion Studios के प्रोडक्शन में तैयार इस अध्ययन में 2024 में रिलीज़ हुई 9 भारतीय भाषाओं की 122 फिल्मों और सीरीज का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट इंडियन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में महिलाओं की भागीदारी, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व की स्थिति पर विस्तृत तस्वीर पेश करती है।
कंटेंट में सुधार, पर रफ्तार धीमी
रिपोर्ट के अनुसार, ‘ओ वूमेनिया! टूलकिट’ टेस्ट में कुल 32% टाइटल्स पास हुए। स्ट्रीमिंग फिल्मों में 16% की उल्लेखनीय बढ़त के साथ 47% टाइटल्स टेस्ट में खरे उतरे, जबकि थिएटर रिलीज़ फिल्में पिछड़ती दिखीं। तेलुगु कंटेंट में 21% का सुधार दर्ज हुआ और 31% टाइटल्स टेस्ट पास करने में सफल रहे।
हालांकि, ट्रेलर्स में महिलाओं का ‘टॉक टाइम’ अब भी केवल 29% है, जो 2022 के 27% से मामूली सुधार है। रिपोर्ट बताती है कि मार्केटिंग अब भी बड़े पैमाने पर पुरुष दृष्टिकोण (Male POV) से संचालित होती है।
कैमरे के पीछे गिरावट चिंताजनक
डायरेक्शन, राइटिंग, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग और प्रोडक्शन डिजाइन जैसे विभागों में महिलाओं की हिस्सेदारी घटकर 13% रह गई है (पिछले वर्ष 15%)। केवल 8% प्रोजेक्ट्स में महिला निर्देशक थीं। हिंदी कंटेंट में ऑफ-कैमरा टैलेंट की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, जबकि अन्य भाषाओं में यह आंकड़ा 5% से भी कम है।
कॉर्पोरेट लीडरशिप में सुधार
रिपोर्ट में एक सकारात्मक संकेत यह है कि 25 बड़ी एंटरटेनमेंट कंपनियों में वरिष्ठ नेतृत्व (डायरेक्टर/CXO) पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 12% से बढ़कर 18% हो गई है। हालांकि यह अब भी सीमित है, लेकिन एक वर्ष में 6% की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इंडस्ट्री लीडर्स की राय
फिल्म क्रिटिक अनुपमा चोपड़ा ने कहा कि यह रिपोर्ट सभी स्टेकहोल्डर्स को अपने फैसलों की समीक्षा कर वास्तविक और विविध महिला आवाजों के लिए जगह बनाने का संदेश देती है।
एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने मेनस्ट्रीम सिनेमा में महिला-प्रधान कहानियों के घटते अवसरों पर चिंता जताई। वहीं प्रोड्यूसर गुनीत मोंगा कपूर ने महिला फिल्ममेकर्स के लिए संस्थागत सपोर्ट और मेंटरशिप की जरूरत पर जोर दिया।
फिल्ममेकर सुरेश त्रिवेणी और राहुल रविंद्रन ने पोस्ट-कोविड थिएटर बाजार में बढ़ते ‘हाइपरमैस्कुलिन’ कंटेंट और महिला-प्रधान फिल्मों के जोखिम पर बात की। वहीं सिद्धार्थ रॉय कपूर ने बॉक्स ऑफिस के सिमटते दायरे और रिस्क लेने की घटती क्षमता को जेंडर असंतुलन की एक बड़ी वजह बताया।
प्राइम वीडियो इंडिया में इंटरनेशनल ओरिजिनल्स की हेड स्तुति रामचंद्र ने कहा कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने जेंडर बैलेंस के मामले में बेहतर माहौल बनाया है, जहां कहानी की गुणवत्ता को जेंडर से ऊपर रखा जा रहा है।
स्ट्रीमिंग आगे, थिएटर पीछे
रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, OTT प्लेटफॉर्म्स पर महिलाओं को ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन दोनों स्तरों पर अपेक्षाकृत बेहतर अवसर मिल रहे हैं। थिएटर सिनेमा अब भी बड़े बजट और पुरुष-प्रधान कहानियों पर अधिक निर्भर दिख रहा है।
यहां देखें पूरी रिपोर्ट: https://www.owomaniya.org/