

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Questions raised over Chhattisgarh’s ₹100-crore crop survey (girdawari) project; Patwaris troubled by technical glitches in the survey app.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि राजस्व विभाग से परियोजना का काम लेने वाली रामटेक सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस कंपनी एक साल भी काम पूरा किए बिना इसे छोड़कर चली गई। अब फसल सर्वे के लिए पटवारियों और सर्वेयरों को प्ले स्टोर के बजाय निजी लिंक के माध्यम से पीबीएफ (फिजिकल वेरिफिकेशन) एप डाउनलोड करने को कहा जा रहा है। एप डाउनलोड करते समय हार्मफुल सॉफ्टवेयर का संदेश आने और सर्वर बार-बार फेल होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे फसल सर्वे की डिजिटल व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग ने करीब दो वर्ष पहले फसलों के भौतिक सत्यापन के लिए रामटेक सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस को लगभग 100 करोड़ रुपये की निविदा दी थी। आरोप है कि कंपनी निर्धारित काम एक साल में भी पूरा नहीं कर सकी और परियोजना छोड़कर चली गई। हालांकि, कंपनी के काम छोड़ने और परियोजना की मौजूदा स्थिति को लेकर संबंधित विभाग की आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।
फसल गिरदावरी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीबीएफ एप को लेकर मैदानी अमले की चिंताएं बढ़ रही हैं। पटवारियों और सर्वेयरों को एप डाउनलोड करने के लिए प्ले स्टोर के बजाय निजी लिंक उपलब्ध कराया जा रहा है। एप डाउनलोड करते समय हार्मफुल सॉफ्टवेयर से संबंधित चेतावनी दिखाई देने की शिकायत है। इससे एप की सुरक्षा और उसे इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पीबीएफ एप के इस्तेमाल के दौरान सर्वर बार-बार खराब होने, खेतों की तस्वीरें अपलोड नहीं होने और लोकेशन दर्ज करने में दिक्कत आने की शिकायतें हैं। इन तकनीकी खामियों के कारण पटवारियों और सर्वेयरों को मौके पर सर्वे करने में अतिरिक्त समय लग रहा है। इससे मैदानी काम प्रभावित होने के साथ ही सर्वे के आंकड़ों की शुद्धता को लेकर भी आशंकाएं पैदा हो रही हैं।
पीबीएफ एप में सर्वेयरों को खेत की चारों दिशाओं के अक्षांश-देशांतर यानी लैटिट्यूड और लॉन्गिट्यूड दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य खेत की वास्तविक स्थिति और फसल के रकबे का भौतिक सत्यापन करना है। ऐसे में एप में तकनीकी समस्याएं आने से सर्वे की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान के वास्तविक रकबे का आकलन डिजिटल सर्वे के आंकड़ों के आधार पर होना है। ऐसे में गिरदावरी के आंकड़ों की सटीकता महत्वपूर्ण है। यदि एप में तकनीकी खामियां बनी रहती हैं, तो सर्वे की समय-सीमा और डेटा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
राजस्व विभाग के सामने अब एप की तकनीकी समस्याओं को दूर करने, सुरक्षा संबंधी चेतावनियों की जांच कराने, मैदानी अमले की शिकायतों का निराकरण करने और सर्वे डेटा के सत्यापन की जवाबदेही तय करने की चुनौती है।