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RBI's new initiative: Preparations to introduce polymer notes in India gain momentum; special emphasis on security standards.
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने मुद्रा व्यवस्था को और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आरबीआइ की नोट मुद्रण शाखा ने पालीमर सब्सट्रेट शीट्स की खरीद के लिए वैश्विक स्तर पर टेंडर जारी किया है। इसके जरिए देश में पालीमर बैंक नोटों की संभावनाओं को परखा जाएगा।शुरुआती योजना के तहत कम मूल्यवर्ग वाले नोटों जैसे 10 और 20 रुपये के पालीमर नोटों को लाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय परीक्षण के परिणामों के आधार पर लिया जाएगा। यदि ट्रायल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोटों के लिए भी पालीमर शीट्स की बड़े पैमाने पर खरीद की जा सकती है।
आरबीआइ ने टेंडर प्रक्रिया में राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई सख्त प्रावधान जोड़े हैं। टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चीन और पाकिस्तान में उनका कारोबार भारत से संबंधित किसी भी गतिविधि से पूरी तरह अलग हो।इसके अलावा कंपनियां ऐसे देशों से कच्चा माल नहीं ले सकेंगी और उन कर्मचारियों को नियुक्त नहीं कर पाएंगी, जिन्होंने चीन या पाकिस्तान में किसी भी भूमिका में काम किया हो।भारत के साथ सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को भी भागीदारी के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना होगा। उन्हें उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी डीपीआइआइटी की पंजीकृत समिति के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों के पास सिक्योरिटी फीचर वाले पालीमर सब्सट्रेट शीट्स की आपूर्ति का अनुभव होना जरूरी है। उन्हें किसी केंद्रीय बैंक या नोट तथा सिक्योरिटी प्रिंटिंग संस्था को कम से कम तीन साल तक ऐसी सामग्री उपलब्ध कराने का अनुभव होना चाहिए।इसके अलावा परीक्षण के लिए कंपनियों को पालीमर शीट के कम से कम 10 नमूने जमा करने होंगे। यह सामग्री पूरी तरह सुरक्षित और जानवरों की चर्बी से मुक्त होनी चाहिए।
पालीमर नोट पतली और लचीली प्लास्टिक सामग्री पर तैयार किए जाते हैं। हालांकि यह प्लास्टिक से बने होते हैं, लेकिन क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कठोर नहीं होते। इनकी प्रमुख विशेषताएं:ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में हल्के होते हैं।इन्हें आसानी से मोड़ा जा सकता है।इनका उपयोग सामान्य मुद्रा की तरह किया जा सकता है।नमी और गंदगी का इन पर कम प्रभाव पड़ता है।इनकी उम्र कागजी नोटों की तुलना में अधिक होती है।लंबे समय तक चलन में रहने के कारण नोटों की छपाई और बदलाव की लागत कम हो सकती है।इनमें आधुनिक सुरक्षा तकनीकों को शामिल करना आसान होता है।
पालीमर नोटों में माइक्रो-आप्टिक होलोग्राम, विशेष प्रकार की स्याही और अन्य सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन आधुनिक फीचर्स के कारण इनकी जालसाजी करना अधिक कठिन हो जाता है।अगर भारत में पालीमर नोटों का प्रयोग सफल रहता है तो यह देश की मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।