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RSS chief Mohan Bhagwat receives a grand welcome upon arriving in Britain; over 100 British Hindu organizations felicitate him.
लंदन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में गुरुवार को ब्रिटेन पहुंचे। उनके ब्रिटेन पहुंचने पर 100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने उनका स्वागत किया। भागवत का यह दौरा RSS की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियानों का हिस्सा है।
मोहन भागवत अपने तीन देशों के दौरे के तहत इससे पहले अमेरिका और कनाडा का दौरा कर चुके हैं। ब्रिटेन उनकी यात्रा का अंतिम पड़ाव है। इस दौरान वे विभिन्न हिंदू संगठनों और समुदायों से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन की ओर से विदेशों में भी संपर्क और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भागवत का मौजूदा दौरा इसी अभियान से जुड़ा बताया जा रहा है।
भागवत की ब्रिटेन यात्रा को लेकर वहां की संसद में भी सवाल उठाया गया। ब्रिटिश-भारतीय सांसद नादिया व्हिटोम ने पिछले सप्ताह सरकार से पूछा था कि क्या मोहन भागवत की यात्रा की नियमों के तहत पूरी समीक्षा की गई है।
गुरुवार को ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने संसद में लिखित जवाब देते हुए कहा कि ब्रिटेन में प्रवेश करने वाले सभी लोगों को देश के इमिग्रेशन नियमों और उनकी शर्तों को पूरा करना होता है।
मंत्री ने व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय विभिन्न प्रकार के खतरों से निपटने और हिंसा या व्यक्तियों तथा समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाली विचारधाराओं के प्रसार पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
डैन जार्विस ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि ब्रिटेन में प्रवेश की मांग करने वाले सभी लोगों को इमिग्रेशन नियमों की निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी। हालांकि, उन्होंने मोहन भागवत के मामले में किसी विशेष जांच या प्रक्रिया के बारे में सार्वजनिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
इससे पहले नादिया व्हिटोम की ओर से भागवत की यात्रा को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया था।
मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने शिकागो में आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। यह कार्यक्रम 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित किया गया था।
वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में करीब 60 देशों से लगभग 2,500 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। भागवत ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण भी दिया था।
2018 के अमेरिका दौरे से जुड़ी उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, भागवत की यात्रा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित थी। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके किसी अमेरिकी राजनयिक के साथ मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का उल्लेख नहीं मिलता।
RSS की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन की ओर से देश के साथ-साथ विदेशों में भी संपर्क कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। मोहन भागवत की अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की मौजूदा यात्रा को इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान के संदर्भ में देखा जा रहा है।