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RSS chief's message: 'Individual progress is possible only through the prosperity of the nation'
कोच्चि। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने राष्ट्र निर्माण और व्यक्तिगत विकास के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की असली प्रगति तभी संभव है, जब देश मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध हो।
‘देश मजबूत तो परिवार और व्यक्ति भी मजबूत’
‘बालगोकुलम’ के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत खुशहाली को राष्ट्र की स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। उनका कहना था कि जब देश प्रगति करता है, तब परिवार और समाज भी उसी दिशा में आगे बढ़ते हैं।
युवाओं की दुविधा पर दिया स्पष्ट संदेश
संघ प्रमुख ने युवाओं के मन में रहने वाले उस सवाल पर भी बात की, जिसमें वे अक्सर करियर और देश सेवा के बीच चुनाव को लेकर भ्रमित रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह दोनों रास्ते एक दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सही दिशा में किया गया करियर निर्माण भी राष्ट्र के विकास में योगदान देता है।
‘सही मार्ग का चयन ही सफलता की कुंजी’
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में ऐसा रास्ता चुनें, जिससे व्यक्तिगत सफलता के साथ साथ देश की उन्नति में भी योगदान हो। भागवत ने कहा कि राष्ट्र के हित में काम करने वाला हर व्यक्ति अंततः खुद भी आगे बढ़ता है।
बच्चों से संवाद, राष्ट्र निर्माण का आह्वान
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित बच्चों से भी बातचीत की और उन्हें देश के भविष्य के रूप में जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी ही देश को नई दिशा देगी, इसलिए अभी से सही सोच और मूल्यों को अपनाना जरूरी है।