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Ram Mandir Donation Theft: Staff hired on trustees' recommendation... Major revelation in the theft investigation; SIT probe intensifies.
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच दल (SIT) की जांच में सामने आया है कि दानराशि की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों की भर्ती केवल आउटसोर्सिंग कंपनी ने नहीं की थी, बल्कि उनकी सिफारिश ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने की थी और बैंक अधिकारियों की मंजूरी के बाद उन्हें नियुक्त किया गया। जांच एजेंसियां इसे सुनियोजित साजिश के तौर पर देख रही हैं।
जांच के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक ने दानपात्रों में जमा नकदी की गिनती और संग्रहण का जिम्मा वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज को दिया था। कंपनी ने कुल 25 कर्मचारियों को नियुक्त किया, लेकिन पूछताछ में कंपनी संचालक ने बताया कि इन सभी नामों की अनुशंसा ट्रस्टियों और बैंक अधिकारियों की ओर से की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी वाराणसी में पंजीकृत होने के बावजूद दानराशि की गणना में लगाए गए सभी 25 कर्मचारी अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले थे। गिरफ्तार किए गए छह आरोपी अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्र इसी कंपनी के कर्मचारी बताए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की पूछताछ में कंपनी मालिक गौरव सिंह ने स्वीकार किया कि कर्मचारियों की नियुक्ति ट्रस्टियों की अनुशंसा और बैंक अधिकारियों की सहमति से की गई थी। उनका कहना था कि कंपनी ने केवल औपचारिक नियुक्ति की, जबकि चयन पहले ही तय हो चुका था। इसी आधार पर जांच एजेंसियां मान रही हैं कि दानराशि में हेराफेरी की योजना पहले से तैयार की गई थी।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज का मुख्य कार्य आउटसोर्सिंग स्टाफ उपलब्ध कराना और हाउसकीपिंग सेवाएं देना था। कंपनी को मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर करोड़ों रुपये की नकदी की गणना का कोई पूर्व अनुभव नहीं था।
इस बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने दोनों के समर्थन में बयान जारी किया है। विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि दोनों ने इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगने से कोई दोषी नहीं हो जाता और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ा कारण वित्तीय निगरानी और निर्णय लेने में लापरवाही मानी जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि समय रहते निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाती और पारदर्शिता के नियमों का सख्ती से पालन होता, तो चढ़ावा चोरी जैसी घटना को रोका जा सकता था। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।