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Relief from India-US trade deal, stock market and rupee showed strength
नई दिल्ली। India-US Trade Deal को लेकर बनी सहमति के बाद भारत की अर्थव्यवस्था पर छाए संकट के बादल छंटते नजर आ रहे हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से भारत के आर्थिक विकास और रोजगारपरक निर्यात पर खतरा मंडरा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच देर रात हुई फोन वार्ता के बाद दोनों देशों में व्यापार समझौते पर सहमति बनी है। इसका सीधा असर शेयर बाजार और रुपये की मजबूती के रूप में सामने आया है।
50% टैरिफ में बड़ी राहत
अब तक भारत पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लागू था, जिसमें 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और 25 प्रतिशत रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया गया दंडात्मक शुल्क शामिल था। समझौते के तहत रूसी तेल खरीद पर लगा 25 प्रतिशत शुल्क समाप्त होगा और पारस्परिक शुल्क घटकर 18 प्रतिशत रह जाएगा। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते होंगे।
कृषि और डेरी बाहर, आयात बढ़ेगा
India-US Trade Deal में कृषि और डेरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है। दोनों देश अगले सात से दस दिनों में साझा बयान जारी करेंगे, जिसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर होंगे। इसके तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करेगा, जबकि फिलहाल यह आंकड़ा सालाना करीब 40 अरब डॉलर है। तेल, गैस, एयरक्राफ्ट और हाईटेक उत्पादों की खरीद भी अमेरिका से बढ़ेगी।
निर्यात और उपभोक्ताओं को फायदा
भारत अमेरिका को सालाना करीब 90 अरब डॉलर का निर्यात करता है, जिसमें 30 अरब डॉलर रोजगारपरक सेक्टर से जुड़े हैं। टैरिफ राहत से इन क्षेत्रों को बड़ी मजबूती मिलेगी। साथ ही समझौते के बाद अमेरिकी पिस्ता, काजू-बादाम, चेरी और सेब जैसे उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते होंगे।
विपक्ष पर सरकार का पलटवार
India-US Trade Deal पर सवाल उठाने वाले विपक्ष पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि यह समझौता देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए बड़ा फैसला है। उनके मुताबिक, इससे भारत को दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती मिलेगी।