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Ruckus in Parliament: No breach of privilege against Rahul Gandhi, motion to terminate his membership tabled
नई दिल्ली। नई दिल्ली में संसद का माहौल उस वक्त गरमा गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। राहुल गांधी सदस्यता विवाद के बीच यह साफ हो गया कि उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला नहीं बन सका। इसी कारण सरकार ने इस मुद्दे पर आगे बढ़ने का विचार छोड़ दिया और राहुल के भाषण के कुछ विवादित अंश रिकॉर्ड से हटाने तक ही सीमित रही।
विशेषाधिकार हनन नहीं, लेकिन सब्सटेंटिव मोशन
हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा के नियम 352(5) और 353 के तहत एक सब्सटेंटिव मोशन पेश किया है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर खतरा पैदा हो सकता है। यह विवाद बजट चर्चा के दौरान दिए गए राहुल गांधी के भाषण से जुड़ा है, जिसके कुछ तथ्यों को लेकर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई थी।
राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साफ कहा कि एफआईआर हो, मुकदमा चले या सदस्यता खत्म करने का प्रस्ताव आए, वे किसानों के हितों के लिए पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि इससे देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की रोजी-रोटी को नुकसान पहुंचेगा।
स्पीकर कक्ष को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
इधर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के 20-25 सांसद लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में घुस गए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया।
क्या है सब्सटेंटिव मोशन
सब्सटेंटिव मोशन संसद में असाधारण परिस्थितियों में लाया जाने वाला प्रस्ताव होता है, जिसका उपयोग सांसद की सदस्यता समाप्त करने जैसे मामलों में किया जाता है। कुल मिलाकर, राहुल गांधी सदस्यता विवाद ने संसद की राजनीति को और तीखा बना दिया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी घमासान और बढ़ने की संभावना है।