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SC dismisses all wildlife import charges against Vantara
नई दिल्ली। अनंत अंबानी के ड्रीम प्रोजेक्ट वंतारा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। वंतारा सुप्रीम कोर्ट फैसला में शीर्ष अदालत ने वंतारा के खिलाफ दायर एक और याचिका खारिज कर दी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि विदेशों से आयात किए गए कई पशु साइट्स के तहत अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार मानकों का उल्लंघन करते हैं। हालांकि अदालत ने साफ कहा कि इस याचिका का कोई ठोस आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी पहले ही वंतारा को क्लीन चिट दे चुकी है। एसआईटी के निष्कर्षों को एक अन्य पीठ भी स्वीकार कर चुकी है। इसके अलावा साइट्स सचिवालय और एसआईटी, दोनों ने स्वतंत्र जांच में पाया कि वंतारा के आयात संबंधी दस्तावेजों और उसकी कार्यप्रणाली में न तो किसी घरेलू कानून का उल्लंघन हुआ और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का। इस तरह वंतारा सुप्रीम कोर्ट फैसला वंतारा के पक्ष में अहम कानूनी समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
वंतारा को मानवीय देखभाल मॉडल के रूप में देखा गया
गुजरात के जामनगर में फैला वंतारा एक बड़े प्राकृतिक परिदृश्य पर विकसित किया गया है, जहां जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा माहौल देने की कोशिश की जाती है। यहां इंसानों के संघर्ष वाले इलाकों से बचाए गए या पिंजरों से लाए गए जानवरों को खुला और सुरक्षित वातावरण मिलता है। उनके रहने की जगह, भोजन, पानी, सामाजिक व्यवहार और स्वास्थ्य की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
अदालत ने यह भी कहा कि वैध अनुमतियों पर केवल इस आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता कि पशुओं के स्थानांतरण के बाद आपत्तियां दर्ज हुई हैं। कोर्ट के अनुसार, जो जानवर पहले से देखभालपूर्ण और कानून-सम्मत वातावरण में रह रहे हैं, उन्हें हटाना क्रूरता के समान होगा। वंतारा सुप्रीम कोर्ट फैसला ने एक बार फिर वंतारा की कार्यप्रणाली और जानवरों की मानवीय देखभाल की प्रतिबद्धता को मजबूती दी है।