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US-Iran war has had a huge impact on the stock market and gas prices, with LNG supply stalled by 20%
मुंबई। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और तेल-गैस ठिकानों पर हमलों के चलते गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स में 2,496.89 अंक (3.26%) की भारी गिरावट दर्ज हुई। यह जून 2024 के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। सेंसेक्स 74,207.24 पर बंद हुआ, जबकि कारोबार के दौरान यह 73,950.95 तक भी गिर गया। एनएसई निफ्टी 50 में 775.65 अंक (3.26%) की गिरावट आई और यह 23,002 पर बंद हुआ।
गिरावट के प्रमुख कारण
जिओसित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, गिरावट के दो मुख्य कारण हैं। पहला, कच्चे तेल की कीमतें $110 से बढ़कर $117–$118 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी और कॉर्पोरेट आय पर असर पड़ने की आशंका है। दूसरा, एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे ने निवेशकों में निराशा बढ़ाई।
वैश्विक बाजार और एलएनजी संकट
अमेरिका-ईरान युद्ध के पहले 20 दिनों में एशियाई और अमेरिकी बाजार भी प्रभावित हुए। जापान का निक्केई 93%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 7.7% और अमेरिका का S&P 500 4.4% गिरा। इसके अलावा, ईरानी मिसाइल हमलों के कारण कतर की 20% एलएनजी सप्लाई ठप पड़ गई। भारत इस सप्लाई पर 40% निर्भर है, जिससे घरेलू रसोई गैस की कीमतें 50% तक महंगी हो सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तनाव कम करने के लिए फ्रांस, ओमान, कतर और मलेशिया के नेताओं से बात की। कई देश हॉरमूज और रास लाफान क्षेत्र में मदद को तैयार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि तक सप्लाई ठप रहने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।