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Bengal Election: SIR protest in Malda, 7 judicial officers held hostage for 9 hours, Supreme Court strict on spreading violence
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के विरोध ने उग्र रूप ले लिया है। मालदा के कालीचक में बुधवार को सात न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बना लिया गया। इनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं। सुरक्षा बलों ने नौ घंटे बाद उन्हें बचाया, लेकिन इस दौरान कई इलाके तनावपूर्ण बने रहे।
भीड़ का विरोध और हिंसक घटनाएं
गुरुवार को भीड़ ने वैध मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाते हुए इंग्लिशबाजार थाना क्षेत्र के यदुपुर इलाके में बवाल किया। पुलिस के पहुंचने पर भीड़ ने हमला किया और एक पुलिस गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। कई जगहों पर हाईवे जाम, टायर जलाना और मौन जुलूस निकालने जैसी घटनाएं हुईं।
इस हिंसा के दौरान सात न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा में लाए गए, जिनमें तीन महिलाएं थीं। प्रशासन ने देर रात लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागकर स्थिति नियंत्रित की। केंद्रीय बलों की दो कंपनियों को भी तैनात किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुर्शिदाबाद में चुनावी रैली में कहा कि उनकी सारी शक्तियां छीनी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में चुनाव रद्द कराने और राष्ट्रपति शासन लागू करने की साजिश रच रही है। ममता ने चुनाव आयोग और प्रशासन पर भी असफलता का आरोप लगाया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक और मालदा के एसपी को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी
मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने सीबीआई या एनआईए को जांच सौंपने का आदेश दिया। पीठ ने राज्य प्रशासन की विफलता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा ध्रुवीकृत और राजनीतिक रूप से प्रभावित राज्य पहले कभी नहीं देखा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने निर्देश दिए कि राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, मालदा के डीएम और एसएसपी मामले में 6 अप्रैल शाम चार बजे ऑनलाइन पेश हों।