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Saurabh Chandrakar, who grabbed attention by posing in 'Pushpa' style, becomes the center of a political row following his arrest.
रायपुर। करीब 6 हजार करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। ओमान से गिरफ्तार कर भारत लाए गए सौरभ का एक वीडियो भी चर्चा में है, जिसमें वह फिल्म 'पुष्पा' के अंदाज में इशारा करता नजर आ रहा है। गिरफ्तारी के बाद CBI टीम के साथ उसका पुष्पा स्टाइल पोज भी वायरल हो रहा है। भारत पहुंचने पर उसका फर्जी पासपोर्ट जब्त किया गया है।
हालांकि, सौरभ की गिरफ्तारी को लेकर बचाव पक्ष के वकील ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने CBI की कार्रवाई को अवैध बताते हुए गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई है। ऐसे में इस हाईप्रोफाइल मामले में अब कानूनी लड़ाई के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
CM साय ने बताया बड़ी सफलता, गृहमंत्री ने किया बड़ा दावा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि CBI लंबे समय से उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही थी। अब उससे पूछताछ के बाद मामले में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
वहीं, प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सियासी संरक्षण में चलाए गए ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट से जुड़े एक-एक दोषी को सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने साफ किया कि इस मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कांग्रेस ने BJP सरकार को घेरा
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस गिरफ्तारी को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने तंज कसते हुए कहा कि देश और प्रदेश में बीजेपी की डबल इंजन सरकार होने के बावजूद महादेव ऐप धड़ल्ले से कैसे चलता रहा, इसकी जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस का सवाल है कि इतने बड़े स्तर पर ऑनलाइन सट्टा कारोबार कैसे संचालित होता रहा और इसे किसका संरक्षण प्राप्त था?
सौरभ के खिलाफ 13 FIR, CBI और ED कर रहीं जांच
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ अलग-अलग मामलों में 13 FIR दर्ज होने की बात सामने आई है। CBI ने इन मामलों की जांच के दौरान दो मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुका है।
अब भारत लाए जाने के बाद CBI और ED की पूछताछ में महादेव ऐप से जुड़े आर्थिक लेनदेन, नेटवर्क और कथित संरक्षण को लेकर अहम जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हजारों करोड़ रुपये के कथित सट्टा कारोबार का नेटवर्क आखिर किन लोगों के सहारे चलता रहा? क्या जांच में राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े नाम भी सामने आएंगे? सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के बाद इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।