

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Serious questions regarding food safety: Lead levels in Govardhan Paneer and milk from two dairies exceed permissible limits; a batch of Patanjali Ghee also found unsafe upon testing.
भोपाल। त्योहारी मौसम से पहले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में ब्लिंकिट के गोदाम से लिए गए गोवर्धन पनीर के नमूने में तय मानक से अधिक सीसा यानी लेड पाया गया है। शहर की कान्हा डेयरी के दूध में भी इस जहरीली धातु की मात्रा निर्धारित सीमा से ज्यादा मिली। इसके अलावा यदु डेयरी के दूध में पानी मिलाने का मामला सामने आया है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में पतंजलि गाय घी के एक बैच का नमूना प्रयोगशाला जांच में असुरक्षित पाया गया है। संबंधित खाद्य सुरक्षा विभागों ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
राजनांदगांव में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच के दौरान गोवर्धन पनीर और कान्हा डेयरी के दूध के नमूनों में सीसे की मात्रा निर्धारित मानक से लगभग तीन गुना अधिक पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, गोवर्धन पनीर के 500 ग्राम के पैकेट में लेड की मात्रा 0.06 मिलीग्राम दर्ज की गई, जबकि कान्हा डेयरी के दूध के नमूने में यह मात्रा 0.051 मिलीग्राम बताई गई है।खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार, इन उत्पादों में लेड की अधिकतम अनुमत मात्रा 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम बताई गई है। सीसा एक विषैली भारी धातु है, जिसका शरीर में जमा होना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा मिलने पर खाद्य पदार्थ की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
गोवर्धन पनीर का निर्माण पुणे स्थित पराग मिल्क फूड्स प्राइवेट लिमिटेड करती है। राजनांदगांव में इस पनीर का नमूना 17 अगस्त को लिया गया था, लेकिन इसकी जांच रिपोर्ट 8 अक्टूबर को मिली। यानी नमूने की जांच पूरी होने में करीब 45 दिन लग गए।विभाग ने जांच में विफल रहे बैच के स्टॉक की जिले में बिक्री पर रोक लगा दी है। इस बैच की एक्सपायरी तारीख 15 अक्टूबर बताई गई है। अधिकारियों को आशंका है कि रिपोर्ट आने तक इस खेप का काफी हिस्सा बाजार में बिक चुका होगा। शेष स्टॉक को दुकानों और वितरण केंद्रों से वापस लेने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राज्य स्तर पर भी इस बैच की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा आयुक्त को पत्र भेजा जा रहा है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अभिहित अधिकारी तरुण बिरला के मुताबिक, गोवर्धन पनीर के मामले में संबंधित कंपनी और ब्लिंकिट को नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, कान्हा डेयरी के दूध में लेड मिलने और यदु डेयरी के दूध में पानी की मिलावट सामने आने के बाद दोनों डेयरियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इस मामले में जांच रिपोर्ट मिलने और कार्रवाई शुरू होने के बीच बीता समय भी चिंता का विषय है। विभाग की ओर से बाजार में उपलब्ध संदिग्ध उत्पादों को हटाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं तक असुरक्षित खाद्य पदार्थ पहुंचने की आशंका कम की जा सके।
छत्तीसगढ़ के मामले के बीच मध्य प्रदेश में पतंजलि गाय घी के एक बैच को लेकर भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। मध्य प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में 200 मिलीलीटर के पैक वाले घी के बैच नंबर FAWB-260017 में लेड की मात्रा निर्धारित मानक से पांच गुना अधिक पाई गई।रिपोर्ट के अनुसार, घी में लेड की अनुमत सीमा 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है, जबकि नमूने में इसकी मात्रा 0.10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। इस आधार पर नमूने को स्वास्थ्य के लिहाज से असुरक्षित माना गया है।यह नमूना 10 अगस्त को छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र के देलाखारी स्थित अनिल किराना दुकान से लिया गया था। भोपाल की केली प्राइवेट लिमिटेड प्रयोगशाला ने 9 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट में इसे असुरक्षित बताया।
मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक मनोज पुष्प के अनुसार, संबंधित बैच के पतंजलि गाय घी की प्रदेश में बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। विभाग ने कंपनी को इस बैच का स्टॉक देशभर से 24 घंटे के भीतर वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं।हालांकि, पतंजलि ने घी को अधोमानक बताए जाने पर आपत्ति जताई है। कंपनी का कहना है कि जिस प्रयोगशाला में नमूने की जांच की गई, वह परीक्षण करने के लिए सक्षम नहीं है। इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आगे की जांच और आवश्यक कदम उठाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI को पत्र लिखा है।
राजनांदगांव में पनीर के नमूने की रिपोर्ट आने में 45 दिन लगना और मध्य प्रदेश में घी की जांच को लेकर कंपनी की आपत्ति, दोनों ही मामले खाद्य पदार्थों की निगरानी व्यवस्था की अहमियत सामने लाते हैं। उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि संदिग्ध उत्पादों की जांच समय पर पूरी हो, रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई में देरी न हो और बाजार में मौजूद संबंधित बैच की उपलब्धता का पता लगाकर उसे हटाया जाए।फिलहाल, गोवर्धन पनीर के संबंधित बैच, दोनों डेयरियों के दूध और पतंजलि घी के मामले में विभागीय कार्रवाई जारी है। उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि की जांच करनी चाहिए। किसी उत्पाद को लेकर आधिकारिक चेतावनी जारी होने पर उसका इस्तेमाल करने से बचना और संबंधित विभाग के निर्देशों का पालन करना उचित होगा।