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Six sand mines in Chhattisgarh that were previously auctioned have not yet received their NOCs.
खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नई रेत खदानों की तलाश आरंग और अभनपुर क्षेत्र में की जा रही है। जबकि इन क्षेत्रों में पहले से डेढ़ दर्जन से अधिक खदानों की नीलामी हो चुकी है। इनमें से कई खदानों की अनुबंध अवधि भी खत्म हो चुकी है, जिनकी दोबारा नीलामी होनी है।
हालांकि आधा दर्जन खदानों की नीलामी होने के बाद पर्यावरण विभाग से उनके ठेकेदारों को एनओसी नहीं मिल पाई है, जिसके कारण रेत का उत्खनन भी शुरू नहीं हो पाया है।
खनिज विभाग के अनुसार जिले में 6 नई रेत खदानें जल्द ही घोषित की जाएंगी। इसके बाद इन खदानों की नीलामी रिवर्स ऑक्सन के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगाए जाएंगे। इस नीलामी में सीलिंग प्राइज राशि तय की जाएगी। इस सीलिंग प्राइज में सबसे कम बोली लगाने वाले आवेदकों को रेत खदान का ठेका दिया जाएगा। हालांकि हर बार कई आवेदकों की समान बोली लगने की स्थिति में अंत में लॉटरी पद्धति से नीलामी की जाएगी। विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया, कि खदानों की नीलामी से पहले नई खदानों को चिन्हांकित करने की प्रकिया की जा रही है। इस प्रक्रिया के दौरान आरंग और अभनपुर क्षेत्र में उन खदानों का चयन किया जाएगा, जहां उत्खनन और परिवहन कार्य के कारण किसी गांव में रहने वाले ग्रामीणों के अलावे वहां चल रहे विकास कार्यों और पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान ना पहुंचे। इसके लिए पटवारी, तहसीलदार एवं खनिज विभाग के निरीक्षक प्रतिवेदन तैयार कर रहे हैं। इस प्रतिवेदन के आधार पर नई खदानों को नीलामी पर देने के लिए घोषित किया जाएगा।
इन नई खदानों को खोलने के पीछे खनिज विभाग यह तर्क दे रहा है, कि नई खदानों की नीलामी होने से जिले में अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगेगा। अधिकारियों का कहना है, कि नदी से लगे घाटों पर कई लोग अंधेरे में अवैध उत्खनन कर रेत का कारोबार कर रहे हैं। इससे शासन को रायल्टी के रूप में मिलने वाले राजस्व की हानि हो रही है। वैध रेत खदानें बढ़ने से अवैध उत्खनन बंद होगा और राज्य को राजस्व भी मिलेगा।