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बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपितों ने सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून का गलत इस्तेमाल किया।जांच के अनुसार, गिरोह के लोग मृतकों के परिजनों से आरटीआई के जरिए मर्ग रिपोर्ट की सत्यापित प्रतियां निकलवाते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों में बदलाव कर सामान्य मौत, दुर्घटना, जहरीले पदार्थ या शराब सेवन से हुई मौत को सर्पदंश का मामला बताकर लाखों रुपये की मुआवजा राशि हड़प ली जाती थी।बिलासपुर के तीन थानों में चल रही जांच में यह बात सामने आई है कि दर्ज 17 मामलों में से अधिकतर में इसी तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया।
पुलिस जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें वास्तविक मौत का कारण सर्पदंश नहीं था, लेकिन दस्तावेजों में बदलाव कर इसे सर्पदंश की घटना दिखाया गया।जांच में राजूकुमार विश्वकर्मा, बहोरन लाल जायसवाल, गुंजमती साहू, शशि पाठक और शंकर साहू से जुड़े मामलों में भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुआवजा राशि लेने की जानकारी सामने आई है।पुलिस का कहना है कि इन मामलों में आवेदकों के बैंक खातों में सरकारी सहायता राशि पहुंची थी, जिसकी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। जांच में कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।सरकंडा थाना क्षेत्र के मामले में अधिवक्ता हीरा प्रसाद खांडेकर की भूमिका की जांच की जा रही है। वहीं कोनी थाना क्षेत्र के प्रकरण में भी उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।सिटी कोतवाली और तोरवा क्षेत्र के मामलों में अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार का नाम सामने आया है। इसके अलावा बिल्हा और तोरवा मामलों में डॉक्टर प्रियंका सोनी की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
इस मामले में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। जांच में एसडीएम कार्यालय में पदस्थ बाबू हरिराम राठौर और तहसीलदार के चालक गोविंद विश्वकर्मा के नाम सामने आए हैं।पुलिस सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
सर्पदंश मुआवजा घोटाले में अब तक सामने आए मामलों से संकेत मिल रहे हैं कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी राशि निकालने का यह खेल बड़े स्तर पर चल रहा था।पुलिस अन्य प्रकरणों, दस्तावेजों और बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने लाई जा सके।