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Stock market plunges, rupee hits historic low
नई दिल्ली। नई दिल्ली में मंगलवार को मुद्रा बाजार ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी। डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे कमजोर होकर 95.68 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 95.74 तक भी गिर गया, जिसे अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। लगातार गिरावट ने आर्थिक मोर्चे पर दबाव और बढ़ा दिया है।
ईरान तनाव और वैश्विक संकट से बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के विफल रहने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा है। कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत की बड़ी निर्भरता आयातित तेल पर होने के कारण डॉलर की मांग बढ़ी और रुपये की कमजोरी गहराती चली गई।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से स्थिति और बिगड़ी
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भारतीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव डाला है। हाल के दिनों में भारी पूंजी निकासी ने रुपये को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। अकेले एक ही सत्र में हजारों करोड़ की बिकवाली दर्ज की गई है।
आरबीआई की दखल और बाजार की उम्मीदें
मुद्रा विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को बड़ी गिरावट से बचाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में दबाव इतना अधिक है कि रुपये की स्थिरता पर लगातार सवाल बने हुए हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो रुपया 100 के स्तर की ओर भी बढ़ सकता है।
शेयर बाजार में चौतरफा गिरावट, निवेशकों की पूंजी डूबी
घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे दिन दबाव में रहा। सेंसेक्स 1,456 अंक गिरकर 74,559 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 436 अंक टूटकर 23,379 के स्तर पर आ गया। बाजार में भारी बिकवाली के चलते निवेशकों की संपत्ति एक ही दिन में 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गई।
आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
बाजार गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी सेक्टर पर देखा गया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.67 प्रतिशत टूटकर तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। टेक महिंद्रा, टीसीएस और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों में बढ़ी चिंता, बाजार का मूड कमजोर
लगातार गिरावट, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात ही बाजार की दिशा तय करेंगे।