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Supreme Court's big decision, Gram Sabhas get the right to stop entry
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पेसा कानून के तहत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े मामलों में निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें गांवों में बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी गई थी।
यह मामला कांकेर जिले की कई ग्राम पंचायतों द्वारा लगाए गए ‘प्रवेश निषेध’ बोर्ड से जुड़ा था। इन बोर्डों के खिलाफ पहले हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई थी। हाई कोर्ट ने भी कहा था कि परंपराओं के संरक्षण के लिए ग्राम सभाओं को पेसा कानून के तहत अधिकार प्राप्त हैं। बाद में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां शीर्ष अदालत ने अपील खारिज कर दी।
ग्राम स्वायत्तता और आदिवासी स्वशासन को मजबूती
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह संविधान की भावना और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की पुनः पुष्टि है। उन्होंने कहा कि अब ग्राम सभाएं वैधानिक अधिकारों के तहत तय कर सकेंगी कि गांव में धर्म प्रचारकों का प्रवेश होगा या नहीं। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा। सरकार का कहना है कि पेसा कानून आदिवासी स्वशासन और ग्राम स्वायत्तता की अवधारणा को सशक्त बनाता है। कुल मिलाकर, यह निर्णय आदिवासी परंपराओं की रक्षा और ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।