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Supreme Court's major decision: Claim of gold worth Rs 170 crore dismissed, domestic violence case dismissed
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई-प्रोफाइल वैवाहिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए अलग रह रही पत्नी द्वारा पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज घरेलू हिंसा का मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि परिजनों पर कोई ठोस और विशिष्ट आरोप नहीं हैं, तो ऐसे मुकदमों को शुरुआती स्तर पर ही समाप्त कर देना चाहिए।
170 करोड़ के सोने का दावा बेबुनियाद
महिला ने दावा किया था कि तलाक समझौते के तहत उसे 120 करोड़ रुपये के गहने और 50 करोड़ रुपये के सोने के बिस्कुट दिए जाने का वादा किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि यह दावा किसी भी आधिकारिक दस्तावेज में दर्ज नहीं था और बाद में शिकायत में जोड़ा गया। इसे अदालत ने पूरी तरह निराधार माना।
समझौते के बाद दर्ज हुआ केस
सुनवाई के दौरान सामने आया कि मई 2024 में दोनों पक्षों के बीच 1.5 करोड़ रुपये के निपटान सहित समझौता हुआ था, जिस पर आंशिक अमल भी किया गया। इसके बावजूद महिला द्वारा बाद में घरेलू हिंसा का केस दर्ज करना अदालत को उचित नहीं लगा।
घरेलू हिंसा के आरोप अस्पष्ट
कोर्ट ने कहा कि शिकायत में हिंसा से जुड़े आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे। लंबे वैवाहिक जीवन के दौरान पहले कभी ऐसे आरोप सामने नहीं आए, जबकि समझौते के बाद अचानक मामला दर्ज किया गया।
परिवार को बेवजह घसीटना कानून का दुरुपयोग
पीठ ने टिप्पणी की कि केवल परिवार के सदस्यों के नाम शामिल कर देना, बिना उनकी किसी प्रत्यक्ष भूमिका के, कानून का दुरुपयोग है। ऐसे मामलों से निर्दोष लोगों को अनावश्यक उत्पीड़न झेलना पड़ता है।
अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की पीठ ने दंपति के रिश्ते को “पूरी तरह टूट चुका” मानते हुए अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को समाप्त कर दिया। साथ ही, शेष भुगतान और संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए।
कानून के दुरुपयोग पर चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भावनात्मक आधार पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करना न्याय प्रणाली का दुरुपयोग है और ऐसे मामलों पर शुरुआती स्तर पर ही रोक लगाई जानी चाहिए।