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Supreme Court: Supreme Court takes strict action on child trafficking, expresses displeasure over negligence of states, grants extension till April 18
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों की तस्करी के मामलों को लेकर राज्यों की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने गृह सचिवों से सख्त लहजे में कहा कि इस गंभीर मुद्दे को प्राथमिकता के साथ लिया जाए, अन्यथा स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
'देशभर में सक्रिय हैं तस्करी के गिरोह'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि देशभर में मानव तस्करी के संगठित गिरोह सक्रिय हैं। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निर्देशों के पालन में लापरवाही पर चेतावनी
कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को दिए गए निर्देशों का पालन न करने वाले राज्यों को ‘डिफॉल्टिंग’ मानने की चेतावनी दी है। कई राज्यों ने तय प्रारूप में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की और न ही समीक्षा समितियों का गठन किया। इस सूची में मध्य प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा और पंजाब जैसे राज्य शामिल हैं।
18 अप्रैल तक अंतिम मौका
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को 18 अप्रैल तक का समय देते हुए कहा कि आवश्यक कार्रवाई राज्य सरकार और पुलिस को ही करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
मानव तस्करी के मामलों में बच्चों की बड़ी हिस्सेदारी
आंकड़ों के अनुसार, देश में 2020 से 2022 के बीच मानव तस्करी के मामलों में 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इनमें लगभग 48 प्रतिशत पीड़ित बच्चे हैं। ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना ऐसे राज्य हैं जहां पीड़ितों की संख्या अधिक सामने आई है।