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Supreme Court takes strict action on highway safety; directs removal of illegal parking and encroachments and improvement of black spots
नई दिल्ली। सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि एक्सप्रेसवे या हाईवे पर लापरवाही से होने वाली एक भी मौत सरकारी तंत्र की विफलता मानी जाएगी और सुरक्षित यात्रा का अधिकार संविधान के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
‘सुरक्षित यात्रा’ को बताया मौलिक अधिकार
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व है। कोर्ट ने चिंता जताई कि देश में राष्ट्रीय राजमार्ग कुल सड़क नेटवर्क का लगभग 2% हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में करीब 30% मौतें इन्हीं मार्गों पर होती हैं।
ब्लैकस्पॉट की पहचान और सुधार के निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि 45 दिनों के भीतर सभी ‘एक्सीडेंट ब्लैकस्पॉट्स’ की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक किया जाए। इसके साथ ही चार माह के भीतर इन स्थानों पर चेतावनी संकेतक और हाई-इंटेंसिटी लाइटिंग की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। संबंधित एजेंसियों को 75 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला स्तर पर सुरक्षा टास्क फोर्स बनेगी
जवाबदेही तय करने के लिए कोर्ट ने देशभर में ‘जिला राजमार्ग सुरक्षा कार्य बल’ गठित करने का आदेश दिया है। इसमें जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक/आयुक्त संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे।
आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश
कोर्ट ने हर 75 किलोमीटर पर लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात करने का निर्देश दिया है, ताकि दुर्घटना के बाद तुरंत राहत मिल सके। साथ ही उन्नत ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए रियल-टाइम निगरानी और ई-चालान व्यवस्था लागू करने पर भी जोर दिया गया है।