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Supreme Court verdict, women officers get right to permanent commission and pension
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) वाली महिला अधिकारियों को, जिन्हें व्यवस्थागत असमानता के कारण स्थायी कमीशन नहीं मिला, पूर्ण पेंशन का हकदार माना जाएगा। यह निर्णय 2019 के नीतिगत बदलावों और पहले के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के फैसलों पर आधारित है।
एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन
नौसेना से जुड़ी योगेंद्र कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने महिला अधिकारियों के कई समूहों को स्थायी कमीशन प्रदान करने की मंजूरी दी। न्यायालय ने कहा कि 2019, 2020 और 2021 में चयन बोर्डों में स्थायी कमीशन के लिए विचार किए गए मामलों को मान्यता दी जाएगी। यह आदेश 1 नवंबर, 2025 से लागू होगा।
पेंशन और सेवा लाभ
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों को इस कानूनी लड़ाई के दौरान सेवा मुक्त किया गया था, उन्हें पेंशन और सेवा लाभ दिए जाएँ। न्यायालय ने चयन बोर्ड की आवश्यकता को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारियों की 20 वर्ष की सेवा को आधार मानकर निर्णय लिया जाएगा।
एनआईए अदालतों और राज्य सरकारों के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा कि वे समर्पित एनआईए अदालतें स्थापित करें और यूएपीए मामलों की सुनवाई एक वर्ष में पूरी करें। साथ ही, न्यायालय ने राज्य सरकारों को ईडी अधिकारियों के मौलिक अधिकारों पर ध्यान देने के निर्देश भी दिए।