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Suspicion of fraud in the Ayushman scheme; simultaneous raids conducted on 18 private hospitals across 7 districts of Chhattisgarh... 44 patients found, and numerous irregularities detected in the records.
रायपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़े अस्पतालों में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। रायपुर समेत प्रदेश के सात जिलों में 18 निजी अस्पतालों में एक साथ जांच की गई। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। जांच टीमों को संबंधित जिले में पहुंचने के बाद ही अस्पताल का नाम बताया गया, ताकि रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका कम हो सके।
रायपुर के एक निजी अस्पताल में जांच के दौरान दूसरे जिलों के 44 मरीज भर्ती मिले। टीम के पहुंचने पर अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और वहां मौजूद स्टाफ भी मरीजों के इलाज से जुड़ी जरूरी जानकारी नहीं दे सका। जांच टीम ने अस्पताल के रजिस्टर जब्त कर लिए हैं।जांच में यह भी सामने आया कि कार्रवाई से दो दिन पहले इसी अस्पताल से ओडिशा के 31 मरीजों को एक साथ डिस्चार्ज किया गया था। टीम को इन मरीजों से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके बाद आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज जानकारी और अस्पताल में मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने चेकलिस्ट के आधार पर आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड की जांच की। इसमें पोर्टल पर दर्ज मरीजों की संख्या, प्री-ऑथराइजेशन, डिस्चार्ज रिकॉर्ड और अस्पताल में वास्तव में भर्ती मरीजों के आंकड़ों का मिलान किया गया।कई मामलों में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर मिलने की बात सामने आई है। फिलहाल संबंधित अस्पतालों के रजिस्टर और दूसरे दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। विभाग यह भी देख रहा है कि आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज जानकारी वास्तविक मरीजों और उनके इलाज से मेल खाती है या नहीं।
रायपुर में हुई जांच के दौरान मेडलाइफ अस्पताल के टीएमएस पोर्टल पर करीब 80 मिनट के भीतर 26 मरीजों के डिस्चार्ज का रिकॉर्ड मिला। जांच दल ने इस रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया है।वहीं लोटस अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित राशि से अधिक रकम वसूले जाने की पुष्टि होने की बात सामने आई है। जांच दल की अनुशंसा के बाद दोनों अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत पंजीयन निरस्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने आयुष्मान योजना में अनियमितताओं के जोखिम के आधार पर कुछ अस्पतालों को चिन्हित किया था। इसके बाद स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने जांच दल गठित कर अस्पतालों का निरीक्षण कराया।28 और 29 सितंबर को हुई कार्रवाई के बाद 30 सितंबर को गठित टीमों ने संबंधित अस्पतालों में पहुंचकर दस्तावेज जुटाए और मौके की स्थिति का निरीक्षण किया।
जांच के दायरे में रायपुर के सात, बिलासपुर के तीन, दुर्ग के दो और सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव तथा कोरबा के एक-एक अस्पताल शामिल बताए गए हैं।इनमें बस्तर का एससीएच हॉस्पिटल, बिलासपुर के अशोक प्रसूति मंदिर, केयर एन क्योर मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मेहता चिल्ड्रन नर्सिंग होम, दुर्ग के श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस और पल्स हॉस्पिटल, कबीरधाम का जय जगन्नाथ हेल्थकेयर, कोंडागांव का नेताम हॉस्पिटल एंड इनफर्टिलिटी सेंटर, कोरबा का हरि कृष्णा केयर हॉस्पिटल और सरगुजा का डीएचटी केयर हॉस्पिटल शामिल हैं।रायपुर में एसआरआईएमएसआर रावतपुरा सरकार हॉस्पिटल, अनंत साईं हॉस्पिटल, महावीर हॉस्पिटल, श्रीनिवास हॉस्पिटल, एसके केयर हॉस्पिटल, विजन सेंटर आई हॉस्पिटल और वरदान हॉस्पिटल समेत अन्य संस्थानों की भी जांच की गई।