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Swine flu hits Janjgir; advisory issued six days after the first death; questions raised about the Health Department's functioning.
जांजगीर। जांजगीर-चांपा जिले में स्वाइन फ्लू (H1N1) और मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। 6 सितंबर को स्वाइन फ्लू से पहली मौत की पुष्टि होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम उठाने और औपचारिक गाइडलाइन जारी करने में करीब छह दिन लगा दिए। इस दौरान विभाग की ओर से कोई स्पष्ट एडवाइजरी सामने नहीं आने से संक्रमण के फैलने की आशंका बनी रही।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में H1N1 के कुल 7 संदिग्ध प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से 3 मरीजों के नमूने जिला स्तर से जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में एक मरीज की रिपोर्ट H1N1 पॉजिटिव आई। इसी मरीज की 6 सितंबर को मौत हो गई।
पहली मौत की पुष्टि के बाद भी तत्काल स्तर पर व्यापक एहतियाती दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए। करीब छह दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए औपचारिक गाइडलाइन जारी की है।
स्थिति गंभीर होने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्रीमती अनिता श्रीवास्तव ने जिले के सभी शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों को संदिग्ध मरीजों की पहचान, उपचार और गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करने को लेकर निर्देशित किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन में हल्के लक्षण वाले मरीजों को जांच की आवश्यकता नहीं होने की बात कही गई है। यहीं से एक अहम सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि हल्के लक्षण वाले मरीजों की जांच नहीं होगी, तो यह कैसे पता चलेगा कि उनमें स्वाइन फ्लू है या सामान्य मौसमी इन्फ्लुएंजा?
विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू और सामान्य फ्लू के कई शुरुआती लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। ऐसे में जांच की सीमित उपलब्धता के बीच संदिग्ध मरीजों की पहचान और निगरानी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कुछ मरीजों ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी जांच और उपचार कराया। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बेहतर इलाज के लिए तत्काल बिलासपुर रेफर किया गया।
जिले में अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संदिग्ध मामलों की निगरानी, गंभीर मरीजों का समय पर उपचार और संक्रमण को समुदाय में फैलने से रोकना है। पहली मौत के बाद जारी हुई गाइडलाइन के जरिए विभाग ने अब अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।