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Tensions escalate in the Strait of Hormuz, with the US deploying more than 15 warships.
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई वार्ता विफल होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी की योजना के तहत 15 से अधिक युद्धपोतों की तैनाती के आदेश दिए हैं।
यूएसएस त्रिपोली निभा रहा है अहम भूमिका
इस ऑपरेशन में USS Tripoli (LHA-7) प्रमुख भूमिका निभा रहा है। यह अत्याधुनिक युद्धपोत एफ-35बी लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर जेट और एमवी-22 ओस्प्रे जैसे उन्नत विमानों से लैस है। इसकी डिजाइन पारंपरिक वेल डेक के बिना की गई है, जिससे यह बड़ी संख्या में फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर तैनात कर सकता है।
नाकेबंदी दोपहर 2 बजे से लागू
यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी स्थानीय समयानुसार दोपहर दो बजे से लागू कर दी गई है। यह कार्रवाई उन सभी जहाजों पर समान रूप से लागू होगी, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं।
गैर-ईरानी जहाजों को सीमित छूट
अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ईरान से जुड़े समुद्री मार्गों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
एफ-35बी और ओस्प्रे से लैस युद्धपोत
यूएसएस त्रिपोली जरूरत पड़ने पर 20 से अधिक एफ-35बी लड़ाकू विमानों का संचालन कर सकता है। इसके अलावा एमवी-22 ओस्प्रे और अन्य हेलीकॉप्टर भी इसमें तैनात हैं, जिससे यह किसी भी सैन्य स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। स्थिति पर दुनिया भर की नजर बनी हुई है।