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The Dual Face of AI: Set to Aid in Treating Critically Ill Patients
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तेजी से स्वास्थ्य क्षेत्र का हिस्सा बन रहा है। एक ओर AI की मदद से गंभीर मरीजों की पहचान, प्राथमिकता तय करने और त्वचा रोगों की शुरुआती पहचान जैसे काम आसान बनाने की तैयारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसके संभावित खतरों को लेकर दुनिया के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञ और धार्मिक नेता चिंता जता रहे हैं।
इसी बीच एम्स दिल्ली और गूगल ने भारतीय स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ‘आरोग्यम’ और ‘इंडसडर्म’ नाम के दो AI टूल विकसित किए हैं। इनका उद्देश्य डॉक्टरों का विकल्प बनना नहीं, बल्कि मरीजों के इलाज में डॉक्टरों की सहायता करना है।
OPD में भीड़ और इंतजार कम करने की कोशिश
एम्स दिल्ली की OPD में मरीजों की भीड़ और प्रतीक्षा समय को कम करने के उद्देश्य से इन AI टूल्स का पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इनका लक्ष्य OPD में मरीजों के इंतजार के समय को करीब 40 प्रतिशत तक कम करना है।
‘आरोग्यम’ AI की मदद से मरीज की स्थिति के आधार पर उसकी प्राथमिकता यानी ट्रायेज तय करने में सहायता करेगा। गंभीर स्थिति वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता देने की प्रक्रिया इससे आसान हो सकती है।
एम्स मीडिया सेल की प्रभारी प्रो. डॉ. रीमा दादा के अनुसार, आरोग्यम के जरिए डॉक्टरों को मरीज की गंभीरता के आधार पर प्राथमिकता तय करने में मदद मिलेगी। इससे ट्रायेज प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।
‘इंडसडर्म’ त्वचा रोगों की शुरुआती पहचान में करेगा मदद
दूसरा AI टूल ‘इंडसडर्म’ भारतीय आबादी की त्वचा के रंग और स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह मरीज की त्वचा की फोटो और उससे जुड़ी जानकारी के आधार पर शुरुआती स्तर पर त्वचा संबंधी बीमारी की पहचान में मदद कर सकता है।
इससे जरूरत वाले मरीजों को विशेषज्ञ तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि, इन AI टूल्स से मिलने वाली जानकारी अंतिम चिकित्सकीय निर्णय नहीं होगी। इलाज और मेडिकल निर्णय डॉक्टर ही करेंगे।
दोनों AI टूल्स में प्रतिदिन करीब 15 हजार तक OPD मरीजों की स्थिति का आकलन करने की क्षमता बताई गई है।
मरीजों की सुविधा के साथ सम्मान और सुरक्षा पर जोर
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने एम्स के 71वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल में मरीज के इलाज के साथ उसके सम्मान, सुरक्षा और भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि AI और रोबोट जैसी नई तकनीक मरीजों के बेहतर इलाज में मदद कर सकती है, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल में मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में देश को आगे बढ़ाने तथा एम्स आने वाले मरीजों की इलाज प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दिया।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बिल गेट्स की चेतावनी
जहां स्वास्थ्य क्षेत्र में AI को मददगार तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने AI के संभावित खतरों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, गेट्स ने कहा है कि अगर AI का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया और खतरनाक लोगों के हाथों में इसकी अत्यधिक शक्तिशाली तकनीक पहुंची, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि AI ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकता है, जिनमें 100 करोड़ तक लोगों की जान जाने का खतरा हो सकता है।
गेट्स ने AI के खतरे को गंभीरता से लेने और इसके लिए प्रभावी नियम-कानून बनाने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि केवल कंपनियों द्वारा अपने स्तर पर AI को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं होगा और सरकारों की निगरानी तथा नियमन की जरूरत है।
पोप लियो की भी AI को लेकर चेतावनी
AI को लेकर पोप लियो ने भी चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि दुनिया को मशीनों के प्रभुत्व वाली ऐसी व्यवस्था की ओर नहीं बढ़ना चाहिए, जहां इंसानियत पीछे छूट जाए।
पोप ने AI के विकास में इंसान और उसकी गरिमा को केंद्र में रखने की बात कही। उन्होंने इससे पहले मई में भी AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।
इलाज की तकनीक या बड़ा खतरा?
AI को लेकर सामने आ रही ये दोनों तस्वीरें इसके प्रभाव के अलग-अलग पहलुओं को दिखाती हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में इसका इस्तेमाल मरीजों की जानकारी को समझने, गंभीर मामलों को प्राथमिकता देने और शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान में सहायता के लिए किया जा रहा है। वहीं, AI के अत्यधिक शक्तिशाली और गलत इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञों और सार्वजनिक हस्तियों की ओर से नियमन, सुरक्षा और मानवीय नियंत्रण की मांग भी उठ रही है।
यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि AI कितना शक्तिशाली है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इस शक्ति का इस्तेमाल किस तरह, किन नियमों के तहत और कितनी मानवीय निगरानी में किया जाता है।