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The Supreme Court made a significant observation in the impeachment case, saying,
नई दिल्ली। कदाचार के आरोपों में महाभियोग का सामना कर रहे इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति उनके कर्तव्यों का निर्वहन कर सकते हैं, तो राज्यसभा के उपसभापति सभापति के कार्य क्यों नहीं कर सकते?
जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस.सी. शर्मा शामिल थे, ने जस्टिस वर्मा द्वारा जांच समिति के गठन और महाभियोग की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली। जस्टिस वर्मा ने इस याचिका में दावा किया है कि राज्यसभा के उपसभापति को न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है।
उपसभापति के अधिकारों पर बहस
जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 के तहत केवल लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति को ही महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार करने का अधिकार है। उनका कहना था कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 91 के प्रावधान लागू नहीं होते।
सुप्रीम कोर्ट ने समय बढ़ाने से किया इनकार
इस मामले में जस्टिस वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका लगा। अदालत ने जांच समिति के समक्ष जवाब दाखिल करने के लिए तय 12 जनवरी की समय-सीमा बढ़ाने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। अब जस्टिस वर्मा को तय समय के भीतर ही जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।
आग की घटना से शुरू हुआ विवाद
उल्लेखनीय है कि 14 मार्च की रात, जब जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश थे, उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे अग्निशमन दल को आवास के एक स्टोर रूम से जले हुए नोटों की बड़ी मात्रा में गड्डियां मिली थीं। इसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया।
संसद में लंबित है महाभियोग कार्यवाही
इस प्रकरण में जस्टिस वर्मा के खिलाफ कदाचार के आधार पर पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग की कार्यवाही लंबित है। लोकसभा सांसदों द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है और जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इसी समिति के समक्ष जस्टिस वर्मा को 12 जनवरी तक जवाब देना है।