

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Chhattisgarh: The final chapter of Naxalism begins; DRG's final mission: 'Papa Rao', dead or alive, by January 31st
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ने अब निर्णायक मोड़ ले लिया है। लगातार आत्मसमर्पण, मुठभेड़ों में शीर्ष नक्सली कमांडरों के मारे जाने और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बीच अब एक ही नाम पर पूरा फोकस आकर टिक गया है—पापा राव। सुरक्षा एजेंसियों के लिए पापा राव इस वक्त सबसे बड़ा और आखिरी मजबूत किला माना जा रहा है।
सरेंडर और मुठभेड़ों से टूटी नक्सलियों की कमर
हाल ही में मोस्ट वांटेड माओवादी नेता देवा बरसे ने हैदराबाद में आत्मसमर्पण किया। उसके साथ 20 अन्य नक्सलियों ने भी हथियार डाल दिए। इससे पहले तेलंगाना और आंध्र प्रदेश मूल के कई शीर्ष नक्सली नेता भी सरेंडर कर चुके हैं, जबकि आधा दर्जन से अधिक टॉप कमांडर मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इन घटनाओं के बाद नक्सल संगठन बुरी तरह कमजोर हो गया है।
अब भी 100 के करीब सशस्त्र नक्सली सक्रिय
हालांकि लगातार मिल रही सफलताओं के बावजूद बीजापुर के घने जंगलों में अभी भी करीब 100 सशस्त्र नक्सली सक्रिय बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे खतरनाक और प्रभावशाली नाम पापा राव का है, जो दशकों से इस इलाके में सक्रिय है और कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है।
DRG का सबसे बड़ा मिशन: पापा राव
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक अब डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) का सबसे बड़ा लक्ष्य पापा राव को जिंदा या मुर्दा पकड़ना है। उसे आत्मसमर्पण का पूरा मौका दिया गया है, लेकिन वह लगातार जंगलों में छिपकर सुरक्षा बलों को चकमा दे रहा है। पापा राव को पकड़ने के लिए उच्च स्तर पर विशेष ऑपरेशन प्लान तैयार किया जा रहा है।
क्यों है पापा राव सबसे बड़ा खतरा?
पापा राव पर कई बड़े हमलों की साजिश रचने का आरोप है। 6 जनवरी को कुटरू-बेदरे रोड पर हुए IED ब्लास्ट में आठ जवानों और एक ड्राइवर की मौत का भी उसे आरोपी माना जाता है। पुलिस ने उस पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। स्थानीय नेटवर्क, जंगलों की गहरी जानकारी और गुरिल्ला रणनीति के कारण वह लंबे समय से पकड़ से बाहर है।
31 जनवरी तक की डेडलाइन
सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों ने पापा राव को 31 जनवरी तक आत्मसमर्पण का आखिरी मौका दिया है। अगर वह तय समयसीमा तक सरेंडर नहीं करता, तो उसके खिलाफ बड़े स्तर पर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा। यानी अब उसके पास केवल करीब 15 दिन का वक्त बचा है।
अन्य शीर्ष नक्सली भी निशाने पर
पापा राव के साथ-साथ देव जी (नक्सल सुप्रीमो), मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम और गणपति भी सुरक्षा बलों के रडार पर हैं। इन नेताओं के खात्मे या आत्मसमर्पण के बाद बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
2025 में नक्सलियों को सबसे बड़ा नुकसान
साल 2025 के आंकड़े नक्सलवाद के कमजोर पड़ने की साफ तस्वीर पेश करते हैं।
कुल 99 मुठभेड़
256 नक्सली मारे गए (पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा)
884 नक्सली गिरफ्तार
पूरे साल में नक्सली एक भी हथियार लूटने में नाकाम रहे