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The government takes major action against rice millers! Bank guarantees worth 11.50 crore rupees are seized, and those who owe 70 crore rupees are also tightened.
रायपुर। कस्टम मिलिंग के तहत तय समय सीमा में चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलर्स के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मार्कफेड ने रायपुर जिले के पांच राइस मिलर्स की करीब 11.50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त कर ली है। इसके साथ ही करोड़ों रुपये के बकाया वाले अन्य मिलर्स पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
30 अप्रैल थी अंतिम तारीख, फिर भी नहीं जमा किया चावल
नियमों के अनुसार राइस मिलर्स को उपार्जन केंद्रों से प्राप्त धान के बदले तैयार चावल 30 अप्रैल तक जमा करना था। हालांकि कई मिलर्स निर्धारित समय सीमा के बाद भी पूरा चावल जमा नहीं कर सके। विभाग की ओर से लगातार नोटिस और चेतावनी दिए जाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई।
19 बड़े मिलर्स पर 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया
मार्कफेड के अनुसार जिले के 19 बड़े राइस मिलर्स पर करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य का चावल बकाया है। इनमें महालक्ष्मी पड्डी प्रोसेसिंग कंपनी, अमित एग्रो प्रोसेसिंग, इंडियन राइस इंडस्ट्रीज, अग्रोहा इंडस्ट्रीज, कोनार्क इंडस्ट्रीज, निर्मला राइस प्राइवेट लिमिटेड, गिदलानी राइस मिल, गुरुनानक राइस इंडस्ट्रीज, मां संतोषी उद्योग और कमल राइस मिल सहित कई इकाइयां शामिल हैं।इन मिलर्स की बैंक गारंटी जब्त करने के लिए संबंधित बैंकों को भी पत्र भेजे जा चुके हैं।
इन कंपनियों पर हुई सबसे बड़ी कार्रवाई
अमित एग्रो प्रोसेसिंग पर 26 हजार टन से अधिक चावल जमा नहीं करने का आरोप है, जिसकी कीमत करीब 6.58 करोड़ रुपये बताई गई है। कंपनी की बैंक गारंटी से लगभग 6 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं।वहीं महालक्ष्मी पड्डी प्रोसेसिंग पर 8.39 करोड़ रुपये मूल्य का चावल बकाया है, जिसके चलते करीब 4.5 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त की गई है। इसके अलावा राइस माउंट, अन्नपूर्णा एग्रो और जिनकुशल राइस मिल पर भी कार्रवाई की गई है।
राशन वितरण पर पड़ रहा सीधा असर
राइस मिलर्स की लापरवाही का असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर भी दिखाई दे रहा है। नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में चावल की उपलब्धता प्रभावित होने से राशन दुकानों तक समय पर आपूर्ति करना चुनौती बनता जा रहा है।बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में एक साथ कई महीनों का राशन वितरण करने में भी विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
32 मिलर्स अब भी रडार पर
विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी भी 32 ऐसे मिलर्स हैं जिन्होंने निर्धारित मात्रा में चावल जमा नहीं किया है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो इनके खिलाफ भी बैंक गारंटी जब्त करने समेत अन्य कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का साफ संदेश
मार्कफेड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धान और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फाइनल नोटिस के बाद भी चावल जमा नहीं करने वाले मिलर्स के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।