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The issue regarding the inclusion of Sonia Gandhi's name in the voter list has gained momentum again; the court has set aside its previous order and directed a fresh hearing on September 29.
नई दिल्ली। सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और पुलिस जांच की मांग को खारिज कर दिया गया था। अब मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के पास भेजा गया है और नए सिरे से सुनवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।हालांकि, अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का कोई आदेश नहीं दिया है। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
यह शिकायत अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई थी। उनका आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी।शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि नाम 1982 में मतदाता सूची से हटाया गया और 1983 में फिर दर्ज किया गया। इसी घटनाक्रम के आधार पर शिकायतकर्ता ने यह सवाल उठाया कि नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में नाम किस आधार और किन दस्तावेजों के जरिए शामिल हुआ। इन आरोपों के आधार पर FIR और जांच की मांग की गई थी।इन आरोपों को फिलहाल अदालत ने सिद्ध तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। मामला अभी दोबारा सुनवाई के चरण में है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश को पर्याप्त कारणों वाला नहीं माना। अदालत के अनुसार, पहले यह तय किया जाना जरूरी था कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के सामने आने की स्थिति बनती है या नहीं और क्या पुलिस जांच की जरूरत है।अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी का पक्ष नहीं सुना गया और पुलिस थाने से स्थिति रिपोर्ट भी नहीं मंगाई गई। अदालत के मुताबिक यह प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 175(3) के तहत महत्वपूर्ण थी।
विशेष अदालत के अनुसार, मजिस्ट्रेट अदालत का ध्यान शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोपों की जांच की आवश्यकता तय करने के बजाय नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े अधिकारों के सवालों की ओर चला गया था।कोर्ट ने माना कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर यह देखना जरूरी था कि कथित तौर पर मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम शामिल करने, झूठी घोषणा या दस्तावेजों के इस्तेमाल से कोई संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं। इसके बाद ही पुलिस जांच या शिकायत पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर फैसला किया जाना चाहिए था।
अब मामला वापस एसीजेएम अदालत में भेज दिया गया है। वहां शिकायतकर्ता और पुलिस का पक्ष सुनने के बाद कानून के अनुसार कारणयुक्त आदेश पारित किया जाएगा। अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित है।इसलिए मौजूदा स्थिति में यह स्पष्ट है कि सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई है। अदालत ने केवल पहले के आदेश को रद्द कर मामले पर नए सिरे से विचार करने का रास्ता खोला है। आगे FIR या जांच का फैसला मजिस्ट्रेट अदालत की अगली कार्यवाही पर निर्भर करेगा।