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The number of criminal gangs has risen from 10 to 19 over the last ten years.
अपराधियों की निगरानी अब सिर्फ थाने की फाइलों तक ही सीमित नहीं रहेगी। पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था के बाद पुलिस ने अपराधियों और सक्रिय गिरोहों का डिजिटल डोजियर तैयार करने की कवायद शुरु कर दी है। इसके तहत पिछले 10 वर्षों के अपराध रिकॉर्ड को खंगालकर ऐसे गिरोहों की पहचान की जा रही है, जो लगातार या अलग-अलग समय में आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। पुलिस पुराने मामलों को दोबारा खंगालकर यह पता लगा रही है, कि किन अपराधियों ने बार-बार अपराध किए, कौन किस गिरोह से जुड़ा रहा और किन गिरोहों का नेटवर्क खत्म या कमजोर हुआ। इसके आधार पर सक्रिय और निष्क्रिय गिरोहों की अलग-अलग पहचान की जा रही है। कमिश्नरेट के 21 थानों के रिकॉर्ड की समीक्षा में 19 सक्रिय गैंग चिह्नित किए गए हैं। कमिश्नरी व्यवस्था से पहले इन्हीं थानों में पुलिस रिकॉर्ड में सिर्फ 10 गैंग थे। वहीं निष्क्रिय हो चुके कुछ गिरोहों को मौजूदा सूची से बाहर किया गया है।
आपको बता दें, कि इस डिजिटल कुंडली में केवल लूट या चोरी करने वाले गिरोह ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इसमें चाकूबाजी, लूट, चोरी और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों में शामिल गिरोहों को भी चिह्नित किया जा रहा है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी, कि कौन सा गिरोह किस तरह के अपराध में सक्रिय है और उसका प्रभाव किन इलाकों में है। पुलिस रिकॉर्ड में चिह्नित सक्रिय गिरोहों में रक्सेल, मोनू एंड ग्यास, रवि साहू, मुकेश बनिया, बबलू-आबिद, आसिफ, यासिन अली, ईरानी और रवि साठे गैंग सहित 19 गिरोह शामिल हैं। इनकी निगरानी संबंधित थाना पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच भी करेगी। गैंग के सदस्यों के जुड़ने, आपराधिक घटनाओं में उनकी भूमिका और क्षेत्र में उनके प्रभाव की जानकारी को भी अपडेट किया जाएगा।
इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर डा. संजीव शुक्ला ने बताया, कि गिरोहों की गतिविधियों की जिला स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। डिजिटल डोजियर तैयार होने से अपराधियों और उनके नेटवर्क पर निगरानी मजबूत होगी और पुलिस को अपराध की रोकथाम और कार्रवाई में मदद मिलेगी।