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The steamer came to a sudden halt amidst the swift currents of the Chambal... 60 passengers held their breath for three hours.
मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में रविवार सुबह चंबल नदी के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। नगरा घाट से आगरा के कैंजरा घाट की ओर जा रहा स्टीमर अचानक बीच नदी में बंद हो गया। उस समय उसमें करीब 60 लोग सवार थे। इंजन बंद होने के बाद स्टीमर तेज बहाव के साथ करीब पांच किलोमीटर तक बहता रहा। करीब तीन घंटे बाद वह भिंड जिले के कक्षपुरा घाट के पास पहुंचा, जहां सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।घटना के बाद स्टीमर के संचालन में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि बारिश के दौरान स्टीमर संचालन पर रोक होने के बावजूद इसे चलाया जा रहा था। इतना ही नहीं, स्टीमर में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों और सामान को भी ले जाया जा रहा था।
स्टीमर रविवार सुबह करीब सवा नौ बजे मुरैना जिले के पोरसा तहसील स्थित नगरा घाट से आगरा के कैंजरा घाट के लिए रवाना हुआ था। इसमें 58 कांवड़िए और उनके स्वजन सवार थे। सभी कांवड़ लेकर आगरा के बटेश्वर मंदिर में गंगाजल चढ़ाने जा रहे थे। इनके अलावा स्टीमर के दो कर्मचारी भी मौजूद थे।स्टीमर में करीब 50 मोटरसाइकिल और अन्य सामान भी लदा हुआ था। यात्रा के दौरान अचानक इंजन बंद हो गया और स्टीमर नदी के तेज बहाव में बहने लगा।
इंजन बंद होने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। सवार लोगों ने मदद के लिए चीख-पुकार शुरू कर दी। मौके की गंभीरता को देखते हुए तीन थानों की पुलिस के साथ कलेक्टर और एसपी भी पहुंचे, लेकिन चंबल का बहाव बेहद तेज होने के कारण प्रशासनिक टीम तत्काल स्टीमर तक नहीं पहुंच सकी।करीब पांच किलोमीटर तक बहने के बाद स्टीमर दोपहर करीब साढ़े 12 बजे भिंड जिले के कक्षपुरा घाट के पास पहुंचा। इसके बाद यात्रियों को सुरक्षित उतारा गया। स्टीमर में मौजूद कुछ गोताखोरों ने भी संकट की स्थिति में यात्रियों की मदद की।
जांच में सामने आया कि यह स्टीमर उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी का है और इसका संचालन आगरा कार्यालय से किया जाता है। बारिश के मौसम में चंबल नदी की स्थिति को देखते हुए स्टीमर के संचालन पर रोक थी। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर स्टीमर का संचालन कराया जा रहा था।स्टीमर की क्षमता करीब 40 लोगों की बताई जा रही है, जबकि घटना के समय उसमें करीब 60 लोग मौजूद थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में बाइक और अन्य सामान भी लदा था।
घटना के दौरान स्टीमर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है। यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट और लाइफ बोट जैसे जरूरी सुरक्षा इंतजाम मौजूद नहीं होने का भी आरोप है।सबसे गंभीर बात यह रही कि स्टीमर का ईंधन ही खत्म हो गया, जिसके कारण बीच नदी में इंजन बंद हो गया। उफनती चंबल में इस तरह स्टीमर का बहना यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
स्टीमर के ठेकेदार चंद्रसेन ने यात्रियों से कथित तौर पर कहा कि पीडब्ल्यूडी की ओर से उसे डीजल उपलब्ध नहीं कराया गया था। हालांकि, स्टीमर के घाट पर पहुंचने के बाद वहां मौजूद पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने ठेकेदार को फटकार लगाई और उससे पूछा कि स्टीमर किसकी अनुमति से चलाया गया था।ठेकेदार ने सफाई देते हुए दावा किया कि यात्री जबरन स्टीमर पर सवार हो गए थे और अगर वह स्टीमर नहीं चलाता तो यात्री उसके साथ मारपीट कर सकते थे।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। बारिश के दौरान प्रतिबंध के बावजूद स्टीमर चलाने, क्षमता से अधिक लोगों को बैठाने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मामले में ठेकेदार समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।समय रहते स्टीमर किनारे पहुंच जाने से सभी यात्री सुरक्षित बच गए, लेकिन घटना ने चंबल में यात्री परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।