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The weather is scorching in April itself, with the 'heat dome' increasing the heat across the country.
नई दिल्ली। मध्य भारत तक इस बार अप्रैल का महीना ही तपती गर्मी का संकेत दे रहा है। कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और हालात सामान्य गर्मी से कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ‘हीट डोम’ नाम का असामान्य मौसमी तंत्र है।
क्या है हीट डोम, कैसे बनता है गर्मी का खतरनाक जाल
स्काईमेट के अनुसार, हीट डोम एक ऐसा सिस्टम है जिसमें वायुमंडल में उच्च दबाव का क्षेत्र ढक्कन की तरह काम करता है। यह गर्म हवा को जमीन के पास ही रोक देता है। जब यह हवा ऊपर नहीं उठ पाती, तो दबाव के कारण और ज्यादा गर्म होती जाती है और लगातार भीषण गर्मी का दौर बन जाता है।
इस प्रक्रिया में जमीन की गर्म हवा ऊपर उठती है, फिर ऊपरी स्तर पर दबाव के कारण नीचे की ओर धकेल दी जाती है। नीचे आते समय यह और अधिक गर्म हो जाती है, जिससे तापमान लगातार बढ़ता रहता है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा असर, कई इलाकों में लू का खतरा
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और दिल्ली जैसे राज्यों में इस समय हीट डोम का सीधा असर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण लू चलने की संभावना जताई गई है। भारत मौसम विभाग ने भी अगले चार से पांच दिनों तक उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में हीटवेव की चेतावनी जारी की है।
दिल्ली समेत कई शहरों में अलर्ट, 24-25 अप्रैल को चरम पर पहुंचेगी गर्मी
राजधानी दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 24 और 25 अप्रैल को भीषण लू का असर देखने को मिल सकता है। वहीं मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ में भी गर्मी और आक्रामक होने के संकेत हैं।
उमस भरी गर्मी ने बढ़ाई परेशानी, तटीय राज्यों में हालात अलग
इस बार सिर्फ सूखी लू ही नहीं, बल्कि उमस भरी गर्मी भी लोगों को परेशान कर रही है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई इलाकों में नमी के कारण चिपचिपी गर्मी का असर बढ़ गया है, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं।
क्यों नहीं मिलती राहत, हीट डोम रोक देता है बादल और बारिश
सामान्य तौर पर जब तापमान बढ़ता है तो आंधी या बारिश की संभावना बनती है, जिससे गर्मी कम होती है। लेकिन हीट डोम के दौरान आसमान साफ रहता है और बादल बनने ही नहीं पाते। इसका कारण मध्य भारत के ऊपर बना एंटीसाइक्लोन सिस्टम है, जो हवाओं को नीचे की ओर धकेलता है।