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ED files major allegation in Supreme Court, claims Mamata Banerjee obstructed investigation
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में एक निजी कंपनी के दफ्तर में चल रही जांच के दौरान एजेंसी की कार्रवाई में बाधा पहुंचाने के लिए सरकारी तंत्र का उपयोग किया। इस आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचने का आरोप, दस्तावेज और डेटा पर हस्तक्षेप
ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि मुख्यमंत्री बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि इस दौरान दस्तावेज उठाए गए, कंप्यूटर बैकअप रोका गया और सीसीटीवी स्टोरेज भी अपने कब्जे में ले लिया गया, जिससे जांच प्रभावित हुई।
सीबीआई जांच की मांग, निष्पक्षता पर उठाए सवाल
एजेंसी ने इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए इसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने की अपील की है। ईडी का तर्क है कि राज्य पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है, क्योंकि आरोप खुद राज्य के शीर्ष नेतृत्व पर हैं।
कानून के शासन पर सवाल, संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला
ईडी ने अदालत में यह भी कहा कि इस घटनाक्रम से कानून के शासन को ठेस पहुंची है। एजेंसी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 से जोड़ते हुए बताया कि समानता और न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना पूरी तरह उचित है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी, अधिकारियों पर दबाव का भी आरोप
मामले की सुनवाई भारत का सर्वोच्च न्यायालय में चल रही है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को डराने और दबाव बनाने की कोशिश की गई। अब अदालत यह तय करेगी कि मामले की जांच किस एजेंसी को सौंपी जाए और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
राजनीतिक और कानूनी टकराव तेज, फैसले पर टिकी नजरें
इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र और राज्य के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है, जो इस संवेदनशील मामले में आगे की दिशा तय करेगा।