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Record voter turnout changes electoral dynamics, Bengal and Tamil Nadu create new history
नई दिल्ली। पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद हुए विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु ने मतदान के मामले में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। गुरुवार को दोनों राज्यों में हुए चुनाव में रिकॉर्ड स्तर पर वोटिंग दर्ज की गई, जिसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत बताया जा रहा है।
बंगाल में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान, 50 साल बाद दिखा शांत माहौल
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 16 जिलों की 152 सीटों पर 92.86 प्रतिशत मतदान हुआ। यह आंकड़ा राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा है। खास बात यह रही कि दशकों से हिंसा के लिए चर्चा में रहने वाला बंगाल इस बार काफी हद तक शांत नजर आया। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो करीब पांच दशक बाद मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा।
तमिलनाडु में भी जोश चरम पर, सभी सीटों पर 85 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर 85.14 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यहां भी मतदाताओं में भारी उत्साह देखा गया। करूर जिला 91.86 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे आगे रहा, जबकि चेन्नई, कोयंबटूर और तिरुचिरापल्ली जैसे बड़े शहरों में भी मजबूत भागीदारी दर्ज हुई।
महिलाओं ने बढ़कर निभाई भूमिका, पुरुषों से ज्यादा मतदान
दोनों राज्यों में एक अहम ट्रेंड सामने आया, जहां महिला मतदाताओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में वोट डाले। यह संकेत देता है कि चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
हिंसा के पुराने रिकॉर्ड टूटे, फिर भी कुछ घटनाएं आईं सामने
हालांकि बड़े स्तर पर कोई गंभीर घटना नहीं हुई, लेकिन कुछ स्थानों पर तनाव देखने को मिला। भाजपा उम्मीदवारों पर हमले, केंद्रीय बलों पर पथराव और कुछ जगहों पर झड़प जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा मतदान के दौरान तबीयत बिगड़ने से चार लोगों की मौत भी दर्ज की गई।
रिकॉर्ड वोटिंग के पीछे सुरक्षा और भरोसे का माहौल
चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भारी मतदान के पीछे दो बड़े कारण रहे, पहला मतदाता सूची पुनरीक्षण का असर और दूसरा सुरक्षा का बेहतर माहौल। जब लोगों को भरोसा मिलता है, तो वे बड़ी संख्या में मतदान के लिए निकलते हैं।
इतिहास बताता है, ज्यादा वोटिंग से बदलती है सत्ता
बंगाल का चुनावी इतिहास यह संकेत देता है कि जब भी रिकॉर्ड स्तर पर मतदान हुआ है, तब सत्ता परिवर्तन हुआ है। 1967, 1977 और 2011 इसके बड़े उदाहरण हैं। ऐसे में इस बार के नतीजों को लेकर राजनीतिक हलकों में उत्सुकता और भी बढ़ गई है।
चुनाव आयोग और नेताओं की प्रतिक्रिया, मतदाताओं को सलाम
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए दोनों राज्यों के मतदाताओं की सराहना की। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शांतिपूर्ण मतदान को लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुरुआती रुझानों के आधार पर अपनी पार्टी की बढ़त का दावा किया है।
अब नजर नतीजों पर, रिकॉर्ड मतदान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
इतने बड़े स्तर पर मतदान के बाद अब सभी की नजर चुनाव परिणामों पर टिकी है। राजनीतिक दलों के साथ आम जनता भी यह जानने को उत्सुक है कि यह ऐतिहासिक वोटिंग किसके पक्ष में जाती है और किसकी किस्मत बदलती है।