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NHRC strict on arbitrariness of schools, notice issued across the country on pressure of private books
नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने निजी स्कूलों द्वारा छात्रों और अभिभावकों पर निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के दबाव को गंभीरता से लिया है। इस मामले में आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
आरटीई कानून और स्कूल बैग नीति के पालन पर जोर
आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 29 और राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राज्यों को 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसमें उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा शामिल हो।
निजी स्कूलों पर आरोप, एनसीईआरटी की जगह थोप रहे निजी किताबें
शिकायत में कहा गया है कि कई निजी स्कूल एनसीईआरटी और एससीईआरटी की किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव डालते हैं। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ता है बल्कि शिक्षा में समान अवसर की भावना भी प्रभावित होती है।
स्कूलवार डाटा और किताबों की सूची का ऑडिट कराने के निर्देश
आयोग ने राज्यों से यह भी पूछा है कि वर्ष 2025-26 में कितने बच्चे सरकारी और निजी स्कूलों में नामांकित हुए। साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि सरकारी और निजी स्कूलों के लिए कितनी किताबें खरीदी गईं। आयोग ने सभी स्कूलों की पुस्तक सूची का ऑडिट कराने का निर्देश भी दिया है।
भारी स्कूल बैग पर भी चिंता, स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा
शिकायत में यह भी बताया गया कि अतिरिक्त टेक्स्टबुक और वर्कबुक खरीदने का दबाव बच्चों के बैग को भारी बना देता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति में इस तरह की अतिरिक्त किताबों को स्कूल लाने पर रोक की बात कही गई है।
प्रशासनिक निगरानी पर सवाल, जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग
आयोग ने राज्यों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उन्होंने जिला स्तर पर अधिकारियों को आरटीई कानून के पालन की निगरानी के लिए कोई निर्देश जारी किए हैं। यदि ऐसे निर्देश नहीं दिए गए हैं, तो तुरंत प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
अब निजी स्कूलों की जवाबदेही तय होगी, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद
इस सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी और छात्रों को समान व किफायती शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सुधार होगा। आयोग की इस पहल से पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है।