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There is a shortage of judges in the country; 8600 complaints were filed in 10 years.
नई दिल्ली। जजों के खिलाफ शिकायतें पिछले एक दशक में लगातार सामने आई हैं। संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ बीते 10 साल में 8,639 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें भ्रष्टाचार और यौन दुराचार जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। यह जानकारी कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
आबादी के मुकाबले जजों की संख्या अब भी कम
देश में न्यायपालिका पर बढ़ते बोझ के बीच जजों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। वर्तमान में प्रति 10 लाख आबादी पर औसतन करीब 22 जज हैं, जबकि विधि आयोग ने इसे कम से कम 50 तक बढ़ाने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट में प्रति 10 लाख आबादी पर केवल 0.028 जज और हाई कोर्ट में करीब 0.92 जज हैं। यह आंकड़े न्याय प्रणाली पर दबाव को दर्शाते हैं।
राज्यों में स्थिति अलग-अलग
राजधानी दिल्ली में प्रति 10 लाख आबादी पर 53.43 जज हैं, जो सबसे अधिक है। इसके बाद हरियाणा (30.81), पंजाब (29.27) और चंडीगढ़ (28.42) का स्थान है। वहीं बिहार (19.45), महाराष्ट्र (19.49) और झारखंड (21.43) जैसे राज्यों में जजों की उपलब्धता कम है।
बढ़ती शिकायतें और सुधार की जरूरत
जजों के खिलाफ शिकायतें 2019 के बाद तेजी से बढ़ी हैं। 2023 से 2025 के बीच 1,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। 2024 में सबसे अधिक 1,170 शिकायतें सामने आईं। स्पष्ट है कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और संसाधनों की मजबूती की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ाने और जवाबदेही तय करने से आम लोगों को तेजी से न्याय मिल सकेगा।