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'There is no lane discipline in India', Supreme Court expresses concern over road accidents
नई दिल्ली। भारत में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि देश में “लेन ड्राइविंग” जैसी कोई अवधारणा ही नहीं बची है और यही सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। अदालत सड़क सुरक्षा से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें समय-समय पर विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।
ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन पर भी नाराजगी
कोर्ट ने सार्वजनिक वाहनों में वाहन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन लगाने के नियमों के पालन पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि अनिवार्य होने के बावजूद देश में 1% से भी कम सार्वजनिक वाहनों में ये सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि नए और पुराने सभी सार्वजनिक वाहनों में समयबद्ध तरीके से ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन लगाए जाएं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हर दिन 546 लोगों की मौत
देश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार जानलेवा साबित हो रही हैं। एनसीआरबी के अनुसार, वर्ष 2024 में सड़क हादसों में करीब 1.99 लाख लोगों की मौत हुई, जो 2023 के 1.98 लाख के मुकाबले 0.79% अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर दिन औसतन 546 लोगों की जान सड़क दुर्घटनाओं में जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं की सामाजिक और आर्थिक लागत देश की जीडीपी का लगभग 3.14% तक पहुंच चुकी है।
शाम का समय सबसे खतरनाक
रिपोर्ट के अनुसार, शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सड़क हादसों की संख्या सबसे ज्यादा रही। इस दौरान कुल दुर्घटनाओं के 20.4% मामले दर्ज किए गए।इसके बाद दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे के बीच 17.1% हादसे हुए। विशेषज्ञों के अनुसार, भारी ट्रैफिक, तेज रफ्तार और लापरवाही इसके प्रमुख कारण हैं।
दोपहिया वाहन बने सबसे बड़ा जोखिम
सड़क हादसों में सबसे अधिक मौतें दोपहिया वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं में हुईं। कुल मौतों में इनकी हिस्सेदारी 48.3% रही। इसके अलावा पैदल चलने वालों की मौत का आंकड़ा 14.7% और कार दुर्घटनाओं का हिस्सा 13.6% दर्ज किया गया।
मई रहा सबसे जानलेवा महीना
वर्ष 2024 में मई का महीना सबसे अधिक दुर्घटनाओं वाला रहा, जबकि मार्च दूसरे स्थान पर रहा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल सड़क हादसों में 59.7% दुर्घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हुईं, जबकि शहरी क्षेत्रों में 40.3% मामले दर्ज किए गए।