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There will be another conflict on India-US relations, Trump gives new threat
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक सार्वजनिक संबोधन में भारत को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि नई दिल्ली “रूसी तेल मुद्दे” पर अमेरिका की मदद नहीं करता है, तो भारतीय आयात पर लगाए गए मौजूदा टैरिफ को और बढ़ाया जा सकता है। एजेंसियों के मुताबिक, ट्रंप ने संकेत दिया कि भारत पर टैरिफ बढ़ाने का फैसला “बहुत जल्दी” लिया जा सकता है।
ट्रंप ने भारत के रूस के साथ तेल व्यापार का जिक्र करते हुए कहा, “वे असल में मुझे खुश करना चाहते थे। प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे आदमी हैं, एक अच्छे इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था। मुझे खुश करना ज़रूरी था। हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से भारत द्वारा रूस से बड़े पैमाने पर तेल आयात का विरोध करता रहा है। अमेरिका का आरोप है कि रूस, भारत जैसे देशों को तेल बेचकर होने वाली कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध को आगे बढ़ाने में कर रहा है। ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले यह भी दावा किया था कि भारत रूसी कच्चे तेल को रिफाइन कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा बेच रहा है, जिससे उसे भारी मुनाफा हो रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में अगस्त 2025 में भारत पर टैरिफ को दोगुना कर 50 प्रतिशत करने के पीछे भी रूस के साथ तेल व्यापार को एक अहम वजह बताया गया था। अब ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिल रहा है कि वॉशिंगटन इस मुद्दे पर भारत पर और दबाव बनाने की रणनीति अपना सकता है।
ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं जब कुछ महीने पहले उन्होंने यह दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “भरोसा दिलाया” था कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। हालांकि, नई दिल्ली ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि ट्रंप और मोदी के बीच इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए स्वतंत्र फैसले लेता है।
भारत सरकार का रुख रहा है कि वह वैश्विक बाजार से सबसे सस्ता और भरोसेमंद तेल खरीदने का अधिकार रखता है, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
रूस इस समय भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, तब रूस ने रियायती दरों पर भारत और चीन जैसे देशों को तेल बेचना शुरू किया। इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतें अपेक्षाकृत कम कीमत पर पूरी करने में मदद मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए रूस के साथ तेल व्यापार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। वहीं अमेरिका इसे रूस पर दबाव डालने के प्रयासों के खिलाफ मानता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिका का आकलन है कि यदि भारत जैसे बड़े खरीदार रूसी तेल से दूरी बनाते हैं, तो रूस की आय पर असर पड़ेगा और यूक्रेन युद्ध को लेकर उस पर दबाव बढ़ेगा।
हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि भारत पर टैरिफ बढ़ाने से अमेरिका–भारत व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर दोनों देशों के कारोबारी हितों पर पड़ सकता है।