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Three daughters from the same family achieved a remarkable feat—preparing online while living in their village, all three succeeded in NEET.
रायपुर। कवर्धा जिले के बोड़ला विकासखंड का नेउरगांव कला इन दिनों तीन बहनों की मेहनत और सफलता को लेकर चर्चा में है। गांव के एक ही परिवार की किरण, ज्योति और सुमन महोबिया ने इस साल राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी NEET पास कर मेडिकल शिक्षा में प्रवेश की दिशा में कदम बढ़ाया है।तीनों बहनों की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बड़े शहर में रहकर महंगी कोचिंग नहीं ली। घर से ही ऑनलाइन कोचिंग के जरिए तैयारी की और पढ़ाई के दौरान एक-दूसरे का लगातार साथ दिया। तीनों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और आपसी सहयोग के दम पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की।
ज्योति और सुमन ने अपनी स्कूली शिक्षा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोड़ला से पूरी की है। वहीं उनकी बड़ी बहन किरण ने सरस्वती शिशु मंदिर, पांडातराई से पढ़ाई की।स्कूली शिक्षा के दौरान ही तीनों बहनों ने मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का लक्ष्य तय कर लिया था। इसके बाद NEET की तैयारी के लिए उन्होंने घर को ही अपनी पढ़ाई का केंद्र बनाया और ऑनलाइन माध्यम से नियमित अध्ययन जारी रखा।
तीनों बहनों की उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा 9 अगस्त को नेउरगांव कला पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से उनके घर पर मुलाकात की और NEET में सफलता के लिए किरण, ज्योति और सुमन को बधाई दी।इस दौरान उन्होंने छात्राओं की माता अगवती महोबिया, पिता राम महोबिया और अन्य परिजनों से भी मुलाकात की। शर्मा ने परिवार के साथ बातचीत कर बेटियों की मेहनत और उपलब्धि की सराहना की।उन्होंने कहा कि एक ही परिवार की तीन बेटियों का मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का संदेश देता है।
विजय शर्मा ने छात्राओं को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद भी उसी मेहनत और अनुशासन के साथ पढ़ाई जारी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनने के बाद बड़े अस्पतालों और अच्छे संस्थानों में काम करके अनुभव हासिल करना जरूरी है, लेकिन अपने समाज और क्षेत्र से जुड़ी जिम्मेदारी को भी नहीं भूलना चाहिए।उन्होंने छात्राओं से कहा कि चिकित्सा शिक्षा और भविष्य में हासिल होने वाले अनुभव का इस्तेमाल जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए किया जाए। लोगों की सेवा से ही डॉक्टर बनने की उपलब्धि को वास्तविक अर्थ मिल सकता है।
तीनों बहनों की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सफलता के लिए केवल बड़े शहर, महंगे संस्थान या सुविधाओं की जरूरत नहीं होती। स्पष्ट लक्ष्य, लगातार मेहनत और सही दिशा में तैयारी हो तो सीमित संसाधनों के बीच भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है।नेउरगांव कला की इन तीनों बहनों ने घर से ऑनलाइन पढ़ाई करते हुए जिस तरह NEET जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षा में सफलता हासिल की, वह ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर प्रेरणादायी है।
उप मुख्यमंत्री से बातचीत के दौरान तीनों बहनों ने अपनी तैयारी से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन कोचिंग के साथ वे घर पर नियमित पढ़ाई करती थीं और कठिन विषयों को समझने के लिए आपस में चर्चा करती थीं।पढ़ाई के दौरान समय का बेहतर प्रबंधन, नियमित अभ्यास और एक-दूसरे की मदद उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा। किसी विषय में परेशानी आने पर तीनों मिलकर उसे समझने की कोशिश करती थीं। इस सहयोग ने तैयारी के दौरान उनका आत्मविश्वास बनाए रखा।
ज्योति और सुमन ने अपने पहले ही प्रयास में NEET उत्तीर्ण कर ली। वहीं बड़ी बहन किरण को सफलता के लिए दो प्रयास करने पड़े। पहली कोशिश के बाद उन्होंने तैयारी में कमियों को पहचाना और दोबारा मेहनत के साथ परीक्षा दी।दूसरे प्रयास में किरण ने भी अपनी दोनों बहनों के साथ सफलता हासिल कर ली। अब तीनों बहनों का अगला लक्ष्य मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ना है।