

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Tibet Earthquake: Massive devastation in Tibet following a 7-magnitude earthquake; 16 people dead and 54 injured; tremors also felt in Pakistan and Afghanistan.
नई दिल्ली। तिब्बत में बीते गुरुवार रात करीब 8 बजे 7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इस प्राकृतिक आपदा में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 54 लोग घायल बताए गए हैं। भूकंप के तेज झटकों से इलाके में दहशत फैल गई। वहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। तिब्बत में लगातार भूकंपीय गतिविधियों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण एक बार फिर क्षेत्र की संवेदनशीलता सामने आई है।
भूकंप का केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर नागकू क्षेत्र में था। चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक, भूकंप जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसके झटके स्थानीय इलाके में स्पष्ट रूप से महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता को देखते हुए क्षेत्र में नुकसान और प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई।
तिब्बत में शक्तिशाली भूकंप के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी धरती हिलने की खबर सामने आई। पाकिस्तान में 4.9 तीव्रता और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। एक ही क्षेत्र के आसपास अलग-अलग तीव्रता के भूकंप आने से लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
तिब्बत दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां भूकंप आने का खतरा अधिक रहता है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली हलचल है। इन प्लेटों के टकराव से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है, लेकिन यही भूगर्भीय गतिविधियां इस क्षेत्र को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील भी बनाती हैं।
जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें तिब्बत में करीब 400 लोगों की मौत हुई थी, जबकि पड़ोसी नेपाल में 13 लोगों की जान गई थी। इस भूकंप के झटके उत्तर भारत समेत दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।
इससे पहले वर्ष 2010 में चीन के पड़ोसी प्रांत छिंगहाई के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस आपदा में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 300 लोग लापता हो गए थे।
तिब्बत में इस साल प्राकृतिक आपदा का खतरा केवल भूकंप तक सीमित नहीं रहा। 26 अगस्त को नेपाल सीमा के पास पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था। इसके कारण नदी का रास्ता कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो गया।
बाद में पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर बढ़ा, जिससे कई गांवों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा। चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में इस आपदा में 43 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 519 लोग लापता हो गए थे। वहीं, नेपाल में बाढ़ से 1,455 लोगों की मौत और 5,285 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।
तिब्बत में बार-बार भूकंप आने की मुख्य वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। भूगर्भीय प्रक्रिया को इस तरह समझा जा सकता है:-
भारतीय प्लेट की गति: भारतीय टेक्टोनिक प्लेट धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ रही है।
यूरेशियन प्लेट से टकराव: भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट पर दबाव डालती है, जिससे पृथ्वी की ऊपरी परत में तनाव पैदा होता है।
चट्टानों में दबाव का जमा होना: जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों और दरारों में लंबे समय तक दबाव जमा होता रहता है।
अचानक खिसकने से भूकंप: जब चट्टानें इस दबाव के कारण अचानक खिसकती हैं, तो ऊर्जा निकलती है और धरती हिलने लगती है। इसी घटना को भूकंप कहा जाता है।
तिब्बत और हिमालय के आसपास का क्षेत्र सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के प्रभाव में आता है। यहां जमीन के नीचे लगातार भूगर्भीय तनाव बनता रहता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में सामने आता है। यही कारण है कि तिब्बत, नेपाल और हिमालय के आसपास के कई क्षेत्रों में भूकंप का खतरा बना रहता है। लगातार आने वाले भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं इस क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी और सुरक्षित निर्माण व्यवस्था की जरूरत को भी रेखांकित करती हैं।