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Toll tax scam: Role of intermediaries and toll collection agencies, along with NHAI officials, is suspicious.
भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआइ को टोल प्लाजा पर सरकारी राजस्व में सेंध लगाने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय यानि ई़डी ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में एनएचएआइ के कुछ अधिकारियों, उनके मध्यस्थों और टोल संग्रह एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इस मामले में आरोप यह है, कि अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए टोल वसूली का एक हिस्सा सरकारी सिस्टम से छिपाकर सरकार को मिलने वाले राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। आरोप लगाया गया है, कि दो अनधिकृत सॉफ्टवेयर से 100 से अधिक टोल प्लाजा पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा था।
ईडी ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत छह राज्यों में 14 परिसरों पर छापेमारी कर 1 करोड़ 3 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। इस मामले में अब तक आठ बैंक लॉकर भी फ्रीज किए गए हैं। ईडी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज, लेखा पुस्तके, वित्तीय अभिलेख, बैंक संबंधी कागजात और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। जांच एजेंसी की 18 से अधिक टीमों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई की।
जांच की शुरुआत मिर्जापुर के लालगंज थाने में 22 जनवरी 2025 को दर्ज एफआइआर से हुई थी। इसके बाद यूपीएसटीएफ ने अतरैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर टोल वसूली में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया था। जांच में पता चला, कि फास्टैग में बैलेंस न होने या अपर्याप्त बैलेंस वाले वाहनों से टोल वसूली के लिए अवैध मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जा रहा था। एप के जरिए फर्जी रसीद तैयार की जाती थी और वसूली की रकम को एनएचएआइ के आधिकारिक सॉफ्टवेयर में दर्ज होने से छिपा दिया जाता था।