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Trump's blunt warning: Shape up or face another strike; Iran retorts we don't just thunder, we strike.
नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में रविवार को आयोजित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता तनावपूर्ण माहौल के बीच उलझती नजर आई। वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि ईरान लेबनान में हिजबुल्ला को समर्थन देना बंद नहीं करता है तो अमेरिका उस पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वार्ता का माहौल बिगड़ गया और अगले दौर की बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।
ईरान का पलटवार: “हमारी सेना तैयार है”
ट्रम्प के बयान पर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद कालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “दुनिया जानती है कि ट्रम्प केवल गरजते हैं, जबकि हम बरसते हैं।” इस बयान ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को और स्पष्ट कर दिया।
होर्मुज और नई धमकियों से बढ़ी चिंता
वार्ता से पहले एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने दावा किया कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल वसूली की व्यवस्था लागू कर सकता है। वहीं, लेबनान पर हमलों के विरोध में ईरान द्वारा शनिवार को होर्मुज मार्ग बंद किए जाने की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया।
वेंस के साथ फोटो से ईरान का इनकार
वार्ता के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ फोटो खिंचवाने से इनकार कर दिया। ईरानी दल में विदेश मंत्री अब्बास अरागची और स्पीकर मोहम्मद कालिबाफ शामिल रहे, जबकि अमेरिकी पक्ष में ट्रम्प के दामाद जेरेड कुश्नर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर तथा कतर के प्रतिनिधियों ने भी वार्ता में भाग लिया।
1. परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद
अमेरिका चाहता है कि ईरान अगले 15 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) रोक दे, जबकि ईरान ऊर्जा जरूरतों का हवाला देते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने पर अड़ा हुआ है।
2. युद्धविराम की मांग
ईरान हिजबुल्ला, हमास और हूती समूहों से जुड़े सभी मोर्चों पर युद्धविराम चाहता है। दूसरी ओर अमेरिका और इजराइल भविष्य में सैन्य कार्रवाई नहीं करने की कोई स्पष्ट गारंटी देने के पक्ष में नहीं हैं।
3. संपत्तियों की बहाली और पुनर्निर्माण पैकेज
ईरान ने कतर में कथित रूप से जमी अपनी 57 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को मुक्त करने की मांग रखी है। इसके अलावा वह 60 दिनों के भीतर खाड़ी देशों से 28 लाख करोड़ रुपये के पुनर्निर्माण पैकेज की भी अपेक्षा कर रहा है।
4. आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग
ईरान ने अपने निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंध हटाने की मांग दोहराई है। हालांकि, अमेरिका की शुरुआती सकारात्मक संकेतों के बावजूद यूरोपीय देश फिलहाल प्रतिबंधों में ढील देने के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं।