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Trump's stance on Iran shifts; makes major statement regarding ballistic missile rights and frozen assets.
नई दिल्ली। पिछले कुछ महीनों तक ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपने बयान में नरमी दिखाते नजर आए हैं। फ्रांस में ईरान के साथ प्रारंभिक शांति समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर होने के बाद ट्रंप ने कहा कि हर संप्रभु देश की तरह ईरान को भी अपनी सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप बैलिस्टिक मिसाइल रखने का अधिकार होना चाहिए।
मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि जब सऊदी अरब, कतर और क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं, तो ईरान को पूरी तरह इस क्षमता से वंचित करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता लागू होने तक फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति जारी रह सकती है।
ट्रंप ने ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों और धनराशि को लेकर भी अपेक्षाकृत उदार रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह धन ईरान का है और यदि कूटनीतिक प्रक्रिया सफल रहती है तो उसे उसकी संपत्तियों तक दोबारा पहुंच मिलनी चाहिए।उनके अनुसार किसी देश की संपत्तियों को लंबे समय तक रोककर रखना अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था और अमेरिकी डॉलर की विश्वसनीयता के लिए भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए अमेरिका को निष्पक्ष वित्तीय नियमों का पालन करना चाहिए।
फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने चीन और रूस की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने ईरान संकट के दौरान हालात को और जटिल नहीं बनाया तथा अमेरिका के प्रयासों में कोई बाधा नहीं डाली।ट्रंप ने कहा कि चीन यदि चाहता तो ईरान को सैन्य और तेल आपूर्ति के जरिए बड़ा समर्थन दे सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उन्होंने इसे जिम्मेदार और संतुलित रवैया बताया।
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते तथा युद्धविराम की घोषणा के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। अब भी 13 भारतीय जहाज वहां फंसे हुए हैं, जबकि पश्चिम एशिया के अन्य समुद्री क्षेत्रों में भारत के लिए तेल, गैस और उर्वरक लेकर आने वाले लगभग 20 अन्य जहाज भी इंतजार कर रहे हैं।बीते चार दिनों में केवल एलएनजी पोत 'दिशा' ही सुरक्षित बाहर निकल पाया है, जिसके गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना जताई गई है।
भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और जहाजरानी मंत्रालय लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन पूरी स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।