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US-Iran tensions again at a fever pitch: From drone downings to retaliatory strikes, war-like situation escalates in the Gulf.
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक बातचीत के बीच एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। युद्धविराम और समझौते की कोशिशों के बीच जमीनी स्तर पर सैन्य टकराव तेज हो गया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है।
ईरान ने अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया, दो और विमानों पर फायरिंग का दावा
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 250 करोड़ रुपये बताई जा रही है।इसके साथ ही ईरान ने यह भी कहा है कि उसने एक अन्य RQ-4 ड्रोन और अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट F-35 पर भी गोलीबारी की है। ईरान ने साफ कहा है कि वह अपने हवाई क्षेत्र और संप्रभुता के उल्लंघन पर जवाबी कार्रवाई का पूरा अधिकार रखता है।
होर्मुज जलमार्ग में टकराव से शुरू हुआ नया संकट
यह पूरा तनाव तब बढ़ा जब सोमवार को होर्मुज जलमार्ग में अमेरिका ने ईरान के दो जहाजों को निशाना बनाकर डुबो दिया। अमेरिका का दावा था कि ये जहाज समुद्री रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहे थे।इसके बाद हालात तेजी से बिगड़े और जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में मिसाइल लॉन्चर साइटों पर हवाई हमले किए।
खाड़ी में अमेरिका को नहीं मिलेगी सुरक्षित पनाहगाह: मोजतबा खामेनेई
ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि खाड़ी देश अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल नहीं बनेंगे।उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में अमेरिका के लिए अब कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं बची है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च नेतृत्व संभालने के बाद मोजतबा खामेनेई पहली बार इतने आक्रामक बयान के साथ सामने आए हैं।
अमेरिका के 42 सैन्य विमान नष्ट होने का दावा
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की कांग्रेस रिसर्च सर्विस ने खुलासा किया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका के 42 सैन्य विमान या तो नष्ट हो गए हैं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें ड्रोन, हेलीकॉप्टर और टोही विमान शामिल बताए गए हैं।
ट्रंप का यू-टर्न, यूरेनियम नष्ट करने की नई शर्त
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पुराने रुख से हटते हुए कहा है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम या तो ईरान में ही या किसी अन्य स्वीकृत स्थान पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी की निगरानी में नष्ट किया जाए।पहले ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका लाने की मांग पर अड़ा हुआ था, लेकिन अब नीति में बदलाव देखा जा रहा है।
ईरान की सख्त शर्त, 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्ति की मांग
वहीं ईरान ने वार्ता में एक बड़ी आर्थिक शर्त रखी है। समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने मांग की है कि अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्ति तुरंत जारी की जाए।ईरान का कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही आधी राशि तुरंत और बाकी राशि अगले 60 दिनों के भीतर जारी की जानी चाहिए।
तनाव के बीच कूटनीति जारी, लेकिन भरोसा कमजोर
दोहा में बातचीत जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और कड़े बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार पर भी बड़ा असर डाल सकता है।